Wednesday, 2 November 2016

चार बीमारियां बनेंगी महामारी, जवाबदेही संग होगी कार्रवाई

-डेंगू, चिकुनगुनिया, फाइलेरिया व मलेरिया के लिए भेजा प्रस्ताव
-निजी संस्थानों व बीमारी फैलाने वालों पर अंकुश को बढ़ेंगे अधिकार
-संक्रमित क्षेत्र हो सकेंगे अधिसूचित, सूचना देना होगा जरूरी
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ: डेंगू के प्रसार पर लगातार उच्च न्यायालय की डांट खा रही प्रदेश सरकार अब चार संक्रामक बीमारियों डेंगू, चिकुनगुनिया, फाइलेरिया व मलेरिया को महामारी घोषित करेगी। इस बाबत प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री के पास भेजा गया है। अब निजी संस्थानों व बीमारी फैलाने वालों पर अंकुश के लिए अधिकार बढ़ाने के साथ जवाबदेही निर्धारित कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
डेंगू की भयावहता पर उच्च न्यायालय का रुख इस कदर गंभीर है कि गुरुवार को मुख्य सचिव तक को तलब कर लिया गया था। मुख्य सचिव ने न्यायालय के समक्ष सरकार की गलती मानने के साथ डेंगू से निपटने के लिए पूरा एक्शन प्लान पेश किया था। इस एक्शन प्लान में डेंगू सहित संक्रामक बीमारियों को महामारी की श्रेणी में लाने की बात शामिल थी। शुक्रवार को प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरुण सिन्हा ने इस बाबत विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर चार बीमारियों डेंगू, चिकुनगुनिया, फाइलेरिया व मलेरिया को महामारी की श्रेणी में शामिल करने के लिए प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया है। यह प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा, जिसके बाद इस बाबत अधिसूचना जारी की जाएगी।
अधिसूचना जारी होने के बाद ये बीमारियां उत्तर प्रदेश में भी इंडिया एपिडिमिक एक्ट, 1897 की परिधि में आ जाएंगी। केंद्र सरकार इसी वर्ष जून में इन बीमारियों महामारी की श्रेणी में घोषित कर चुकी है। केंद्र की अधिसूचना को उत्तर प्रदेश को अंगीकार करना था, किन्तु ऐसा नहीं हुआ। अधिसूचना जारी होने के बाद सरकार इनमें से किसी भी बीमारी के मरीज बढऩे पर संबंधित क्षेत्र को संक्रमित क्षेत्र घोषित कर सकेगी। इसके बाद उस बीमारी की तुरंत सूचना देना जरूरी हो जाएगा। ऐसा न करने वाले निजी अस्पतालों व अन्य निजी संस्थानों पर भी कार्रवाई हो सकेगी। बीमारियां फैलाने के कारक बनने वालों, जैसे जलभराव करने वालों, गंदगी फैलाने वालों आदि तत्वों को चिह्नित कर उनके खिलाफ दंडनीय कार्रवाई भी संभव होगी। इसके लिए हर जिले में एक नियंत्रण अधिकारी की तैनाती भी की जाएगी।

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