Thursday, 10 November 2016

बेटियां मरें तो मरें, नहीं ले जाएंगे अस्पताल


- गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे नवजात बच्चों में बेटियां आधी
- इटावा व ललितपुर में तो भर्ती बच्चियां तीस फीसद से भी कम
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डॉ.संजीव, लखनऊ:
बेटी बचाने को लेकर हो रही बड़ी-बड़ी बातों के बावजूद अभिभावक बेटियों की जिंदगी बचाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। हालत ये है कि गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचने वाली बेटियों की संख्या बेटों की तुलना में लगभग आधी है।
देश में इस समय बेटी बचाओ नारे के साथ बड़ा अभियान चल रहा है। इसके बावजूद बेटियों के साथ अन्याय थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में इस बाबत जारी स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस तथ्य की पुष्टि कर रहे हैं। प्रदेश में गंभीर अवस्था में पैदा होने वाले नवजात शिशुओं में यदि बेटी बीमार होती है तो घर वाले उसे अस्पताल ले जाने में भी कोताही करते हैं। प्रदेश के सभी जिलों में स्थापित नवजात शिशु रक्षा इकाई में भर्ती होने वाले कुल बच्चों में से बेटों की संख्या हर माह औसतन 63 फीसद रहती है, वहीं बेटियों की संख्या 37 फीसद पर सिमटी है। कुछ जिलों में तो यह स्थिति बहुत खराब है। इटावा में भर्ती होने वाले गंभीर नवजात शिशुओं में महज 25 फीसद बेटियां होती हैं और ललितपुर में यह आंकड़ा 29 फीसद है। अधिकारी भी इस स्थिति को स्वीकार करते हैं। उनका कहना है कि इनमें 37 फीसद बेटियां इसलिए अस्पताल में इलाज पा जाती हैं, क्योंकि अस्पताल पहुंचने वाले कुल बच्चों में से वहीं पैदा हुए बच्चों की संख्या 53 फीसद होती है। प्रदेश स्तर पर नवजात शिशु इकाइयों में कुल भर्ती हुए बच्चों में से बाहर पैदा हुए बच्चों की संख्या भले ही 47 फीसद हो, किन्तु कई जिलों की स्थिति बहुत खराब है। मीरजापुर में सिर्फ 6 फीसद बच्चे ही अस्पताल पहुंचते हैं, वहीं मुरादाबाद में सात फीसद व बुलंदशहर में 15 फीसद बच्चे अस्पताल तक पहुंच पाते हैं।
उपकरण खराब, फोन बंद
वैसे प्रदेश के नवजात शिशुओं के इलाज में लापरवाही भी जबर्दस्त हो रही है। अधिकांश इकाइयों में बच्चों के इलाज के लिए जरूरी उपकरण ही काम नहीं करते हैं। आगरा मेडिकल कालेज की नवजात शिशु इकाई में 58 फीसद व मेरठ मेडिकल कालेज में 39 फीसद बार बच्चों के लिए जरूरी रेडियेंट वार्मर काम करता नहीं मिला। शाहजहांपुर जिला महिला अस्पताल में बच्चों का पल्स ऑक्सीमीटर लंबे समय से खराब पड़ा है तो राजधानी लखनऊ के वीरांगना अवंतीबाई अस्पताल, प्रतापगढ़ व अलीगढ़ के जिला महिला अस्पतालों का पल्स ऑक्सीमीटर 60 फीसद बार जरूरत के समय काम ही नहीं कर सका। राजधानी के वीरांगना अवंती बाई अस्पताल और प्रतापगढ़, शाहजहांपुर, मेरठ व अलीगढ़ के जिला महिला अस्पतालों में शिशु उपचार इकाई का एयरकंडीशनर भी अक्सर खराब रहता है। मेरठ, प्रतापगढ़, फैजाबाद, शाहजहांपुर, ललितपुर, बांदा, इटावा व बुलंदशहर के जिला महिला अस्पतालों और गोरखपुर व आगरा मेडिकल कालेजों की नवजात शिशु उपचार इकाइयों में टेलीफोन भी बंद पड़े हैं।

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