Thursday, 3 November 2016

...तो नए साल में मिल पाएगा सातवां वेतनमान


-दीवाली के आसपास कर्मचारियों को लाभ देने की रणनीति सफल नहीं
-अभी प्रारंभिक रिपोर्ट ही तैयार नहीं, ऐसे में विलंब होना लगभग निश्चित
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ: कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों का लाभ दीवाली के आसपास तक देने के लिए राज्य सरकार ने तेजी तो की थी किन्तु वह दीवाली के बाद भी प्रभावी साबित होती नहीं दिख रही है। माना जा रहा है कि कर्मचारियों को नए साल में ही सातवें वेतनमान का लाभ मिल पाएगा।
केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू कर दिया था। इसके बाद सितंबर में प्रदेश सरकार ने भी इन्हें स्वीकार करने के साथ सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी गोपबंधु पटनायक की अध्यक्षता में समीक्षा समिति भी गठित कर दी थी। पटनायक ने 11 अगस्त को काम भी संभाल लिया था। सरकार ने समीक्षा समिति के गठन का आदेश जारी करने के साथ तीन माह के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट भी मांगी थी। इसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा था कि दीवाली के आसपास राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ मिल जाएगा। समिति ने राज्य कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों के साथ आम जनता का पक्ष सुनने की भी पहल की। तीन सौ से अधिक कर्मचारी संगठनों की बात सुनने के बाद समीक्षा समिति ने विभिन्न सरकारी विभागों का पक्ष सुनना शुरू किया है। वित्त विभाग से वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता व संभावित खर्चे पर एक चक्र विचार विमर्श भी हो चुका है।
अब तक प्रारंभिक संस्तुतियां भी न तैयार हो पाने के कारण दीपावली के आसपास ही नहीं, पूरे नवंबर में भी कर्मचारियों को इसका लाभ मिल पाने की उम्मीद नहीं लग रही है। स्वयं समीक्षा समिति के अध्यक्ष ने 15 नवंबर तक प्रारंभिक रिपोर्ट देने का लक्ष्य निर्धारित किया था। उनका कहना है कि जल्द से जल्द रिपोर्ट देने की कोशिश हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद भी इसे लागू करने की प्रक्रिया खासी लंबी है। नवंबर के अंत तक यदि प्रारंभिक रिपोर्ट मिल भी गयी तो उस पर अमल का फार्मूला तैयार कर कैबिनेट में लाया जाएगा। कैबिनेट से पास होने के बाद दिसंबर में यदि अमल की घोषणा भी हुई तो जनवरी से पहले कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के अनुरूप वेतन नहीं मिल पाएगा। इस बीच चुनाव की घोषणा होने की स्थिति में भत्तों आदि से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट बाद में आएगी, जिस पर नयी सरकार ही फैसला लेगी।
वेतनमान में फंसा डीए
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पिछले दिनों दो फीसद महंगाई भत्ता (डीए) मिल चुका है। राज्य कर्मचारियों को वह भत्ता भी नहीं मिल पा रहा है। दरअसल केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू होने के साथ ही उन्हें मिल रहा 125 फीसद महंगाई भत्ता उनके मूल वेतन में जोड़ दिया गया था। ऐसे में उन्हें मिला दो फीसद महंगाई भत्ता छठे वेतनमान के फार्मूले के हिसाब से पांच फीसद से ऊपर बैठता है। उत्तर प्रदेश के मामले में अधिकारी अभी इस पर फैसला नहीं कर पा रहे हैं। 

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