Wednesday, 2 November 2016

डेंगू के तीस गुनहगार तो रिटायर हो चुके!


-हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी धीरे-धीरे हो रही कार्रवाई
-18 अफसरों को दिया गया नोटिस, 15 दिन में मांगा जवाब
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ: सूबे में जानलेवा साबित हो रहे डेंगू के लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी धीरे-धीरे कार्रवाई हो रही है। डेंगू के तीस गुनहगार तो रिटायर भी हो चुके हैं। अब उनके खिलाफ कार्रवाई से हाथ खड़े करने के साथ स्वास्थ्य विभाग ने 18 अफसरों को नोटिस देकर उनसे 15 दिन में जवाब मांगा है।
उत्तर प्रदेश में लगातार भयावह हुए डेंगू पर सरकारी उदासीनता के बाद हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। लगातार सख्ती के बावजूद कार्रवाई न होने से निराश हाईकोर्ट ने पिछले दिनों प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने तक की चेतावनी देने के साथ मुख्य सचिव को तलब भी कर लिया था। इस पर सरकार एक दिन के लिए सक्रिय हुई और मुख्यमंत्री तक ने बैठक कर डाली। मुख्य सचिव अदालत में पेश हुए और एक्शन प्लान सौंपा। उसमें बताया गया था कि डेंगू के लिए जिम्मेदारी तय करते हुए प्रदेश के 48 अफसर चिह्नित हुए हैं। उनके खिलाफ 15 दिन के भीतर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट में पेशी के एक सप्ताह के बाद भी इनमें से एक भी अफसर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। इस बीच पड़ताल कराई गयी तो पता चला कि जिन 48 अफसरों को चिह्नित किया गया है, उनमें से तीस तो रिटायर हो चुके हैं। सरकार ने अदालत में निलंबन की बात कही है और रिटायर हो चुके व्यक्ति का निलंबन नहीं हो सकता, इसलिए ये सारे लोग किसी भी तरह की कार्रवाई से बच गए हैं। जो बचे 18 लोग हैं, उनमें से कई अब निदेशालय में तैनात हैं। प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरुण सिन्हा ने बताया कि शेष 18 लोगों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। उनका जवाब मिलने के बाद उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई होगी। हाईकोर्ट की अगली सुनवाई में इस बाबत पूरी रिपोर्ट दी जाएगी।
तकनीकी समिति की बैठक कल
हाई कोर्ट में मुख्य सचिव द्वारा एक्शन प्लान पर अमल करते हुए शासन ने प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरुण सिन्हा की अध्यक्षता तकनीकी समिति गठित कर दी है। इस समिति में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, लोहिया संस्थान व किंग जार्जेज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि भी शामिल किये गए हैं। समिति की पहली बैठक चार नवंबर को होगी। इसमें डेंगू से निपटने का एजेंडा भी तय किया जाएगा, ताकि हाई कोर्ट की अगली सुनवाई में उसे पेश किया जा सके।

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