Monday, 24 October 2016

आंकड़े छिपाकर भी सूबे में पड़ोसियों से ज्यादा डेंगू

-सिर्फ 5653 मरीजों के साथ 19वें स्थान पर होने का दावा
-हरियाणा, मध्यप्रदेश, राजस्थान व बिहार से फिर भी आगे
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ: डेंगू के मामले में जमकर आंकड़े छिपाने के बावजूद उत्तर प्रदेश में पड़ोसी राज्यों से ज्यादा डेंगू का प्रकोप पाया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर आबादी को आधार बनाकर डेंगू के मरीजों की संख्या पर जारी सूची में प्रदेश 19वें स्थान पर हैं। इसके लिए अफसरों ने सिर्फ 5653 मरीजों का दावा किया था, इसके बावजूद हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान व बिहार की तुलना में यहां डेंगू का प्रकोप तेज रहा है।
हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पूरे देश में डेंगू प्रभावित 34 राज्यों की स्थितियों के आंकड़े जारी किये हैं। इसमें प्रति दस लाख आबादी पर डेंगू के प्रकोप को आधार बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इन आंकड़ों को लेकर खासे प्रसन्न हैं। उनका कहना है कि डेंगू के प्रकोप के मामले में प्रदेश 19वें स्थान पर है। इन आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद स्थितियां स्पष्ट नजर आती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र को भेजी जानकारी में प्रदेश में सिर्फ 5653 मरीज होने का दावा किया है। इस तरह यहां प्रति दस लाख आबादी में 28.37 लोग डेंगू से पीडि़त हैं। इन आंकड़ों में डेंगू से सिर्फ छह लोगों की मौत मानी गयी है, इस तरह मृत्यु का प्रतिशत भी 0.11 फीसद पर सिमट गया है। इतना झूठ बोलने के बाद भी उत्तर प्रदेश 15 राज्यों से पीछे हैं। इनमें भी अधिकांश सूबे के पड़ोसी राज्य है। तुलनात्मक अध्ययन के अनुसार हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार में डेंगू का प्रकोप उत्तर प्रदेश से काफी कम है। यही नहीं, झारखंड व छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भी डेंगू पर नियंत्रण रखने में सफल हुए हैं।
नहीं सुधर रहे सीएमओ
शासन के बड़े-बड़े दावों, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रियों की तमाम चेतावनियों के बावजूद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) नहीं सुधर रहे हैं। कई बार कहने के बाद भी जिलों से सही आंकड़े नहीं आ पा रहे हैं। शनिवार तक के समग्र्र आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो प्रदेश में डेंगू के संदेह में 28,499 मरीजों के रक्त के नमूने लिये गए, इनमें से 8,479 मरीजों को डेंगू की पुष्टि हुई। इसके विपरीत मुख्य चिकित्सा अधिकारियों द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट में डेंगू के सिर्फ 2947 मरीज होने की बात कही गयी है। सरकारी अधिष्ठानों की ही रिपोर्ट में यह विरोधाभास सीएमओ की लापरवाही उजागर करने वाला है।
जिलों से मांगा 17 तक ब्यौरा
शासन भी सीएमओ की लापरवाही को लेकर गंभीर है। सीएमओ की सूची में सर्वाधिक 580 मरीज लखनऊ के हैं। लखनऊ की यह संख्या हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी, जब दिन-रात एक कर निजी प्रतिष्ठानों में छापे मारे गए थे। प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरुण सिन्हा ने बताया कि लखनऊ की तरह ही सभी जिलों में निजी प्रतिष्ठानों से आंकड़े जुटाकर 17 अक्टूबर तक पूरा ब्यौरा भेजने के निर्देश मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को दिये गए हैं। इनमें लापरवाही पाए जाने पर संबंधित सीएमओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
(15/10/16)

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