Monday, 24 October 2016

सत्ता-कालेज गठजोड़ ने महंगा किया डॉक्टर बनना


-आसपास के राज्यों की तुलना में दोगुना से अधिक एमबीबीएस फीस
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डॉ.संजीव, लखनऊ
भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआइ) की तमाम कोशिशों के बावजूद उत्तर प्रदेश में निजी मेडिकल व डेंटल कालेजों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग सका है। सत्ता व निजी कालेजों के गठजोड़ से यहां डॉक्टर बनना खासा महंगा हो गया है। प्रदेश में निजी कालेजों से एमबीबीएस करने की फीस आसपास के राज्यों से दोगुना से भी अधिक है।
उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र के 28 मेडिकल कालेज संचालित हैं। पिछले वर्ष तक इन कालेजों में मनमाने ढंग से शुल्क वसूली की जाती थी। निजी कालेज संचालक प्रवेश भी सीधे ले लेते थे। भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआइ) की पहल और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद इस वर्ष इन कालेजों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंटरेंस टेस्ट (नीट) की अनिवार्यता के बाद सरकार ने आम मेधावी विद्यार्थी को भी निजी कालेजों में अवसर देने के लिए आधी सीटें 36 हजार रुपये में भरने और शेष सीटों के लिए कालेजवार 17.64 लाख से 21.32 लाख रुपये के बीच शुल्क निर्धारित कर दिया। इस फैसले को निजी कालेजों ने अदालत में चुनौती दी, तो अदालत के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने आंकलन के बाद नौ लाख रुपये के आसपास औसत शुल्क प्रस्तावित किया। सत्ता से निजी कालेजों का गठजोड़ काम आया और ये लोग एमबीबीएस के लिए शुल्क 11.30 लाख रुपये वार्षिक कराने में सफल हो गए। यह शुल्क आसपास के राज्यों की तुलना में दो से तीन गुना तक है। मध्यप्रदेश और उत्तराखंड के निजी कालेजों में औसत शुल्क साढ़े पांच लाख रुपये है तो छत्तीसगढ़ में यह सिर्फ 3.8 लाख रुपये वार्षिक है। राजस्थान में आधी सीटें तो मात्र 16 हजार रुपये वार्षिक शुल्क पर भरी जाती हैं। शेष सीटों के लिए भी शुल्क पांच लाख रुपये वार्षिक ही है। केरल, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश के निजी कालेजों में भी शुल्क उत्तर प्रदेश से कम है। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ.वीएन त्रिपाठी का कहना है कि यह अंतरिम शुल्क है। तीन माह भीतर अंतिम शुल्क निर्धारित किया जाना है, उसमें सभी बिन्दुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
खाली रह गयीं 1145 सीटें
प्रदेश के 28 निजी कालेजों की 3800 एमबीबीएस सीटों में से 1145 सीटें खाली रह गयी हैं। सभी मेडिकल कालेजों में हर हाल में 30 सितंबर तक सभी प्रवेश हो जाने चाहिए थे। नीट की काउंसिलिंग में ज्यादातर सीटें खाली रह जाने पर सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से समय मांगा तो सात अक्टूबर तक समय मिल गया। इसमें भी सीटें नहीं भरने पर सरकार व निजी कालेज फिर सर्वोच्च न्यायालय की शरण में गए, किन्तु न्यायालय ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया।
एमबीबीएस पर खर्च 70 लाख
उत्तर प्रदेश के निजी कालेजों से एमबीबीएस करने के लिए औसत खर्च 70 लाख रुपये आ रहा है। प्रारंभिक शुल्क के रूप में 11.30 लाख रुपये प्रति वर्ष की दर से साढ़े चार साल के लिए 50.85 लाख रुपये शुल्क बनता है। निजी कालेज पांच साल छात्रावास सहित अन्य खर्चों के रूप में औसतन चार लाख रुपये ले रहे हैं। कुछ पुराने व प्रतिष्ठित कालेजों में यह खर्च इससे अधिक तो नए में कुछ कम है। कुल मिलाकर एमबीबीएस पास कर निकलने तक औसत खर्च 70 लाख रुपये आ रहा है।
(18/10/16|)

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