Sunday, 24 July 2016

अस्पताल की चादर साफ सुथरी! हां, भाई हां


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- निजी क्षेत्र को सौंपी जाएगी बेडशीट्स व बिस्तरों की सफाई
- पहले चरण में 37 जिलों के 50 अस्पतालों में होगा अमल
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डॉ.संजीव, लखनऊ :
सरकारी अस्पताल के बारे में सोचते ही जो छवि बनती है, वह फटे गद्दे, गंदी चादरें और मजबूरी में बेड पर लेटने जैसी होती है। प्रदेश सरकार अब जो करने जा रही है, उससे इस छवि में बदलाव आ सकता है। अब स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों की चादरों व बिस्तरों की सफाई निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया है। पहले चरण में 37 जिलों के 50 अस्पतालों में इसी वर्ष से  अमल होगा।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित घोष ने बताया कि उत्तर प्रदेश हेल्थ सिस्टम स्ट्रेंग्थेनिंग प्रोजेक्ट अस्पतालों में 'मैकेनाइज्ड लांड्री' का संचालन निजी क्षेत्र की मदद से कराने का फैसला हुआ है। 50 अस्पतालों में निजी कंपनियों को एक साल के लिए चादरों व बिस्तरों की सफाई का जिम्मा सौंपा जाएगा। उनका  काम ठीक हुआ दो साल के लिए इसे बढ़ाया जाएगा। अभी हाथ से चादरों की धुलाई के कारण सर्वाधिक दिक्कत जाड़ों व बरसात में होती है। मैकेनाइज्ड धुलाई से यह संकट कटेगा। धुली चादरें मिलेंगी तो अस्पताल जनित संक्रमण का खतरा भी घटेगा। इसीलिए चादरों की छंटाई से लेकर जरूरत पर गद्दों की मरम्मत तक का काम निजी कंपनी को सौंपा जाएगा। यह भी निर्देश हैं कि धुले कपड़े वार्ड तक बंद ट्राली में लाए जाएं।
बैक्टीरिया फ्री पर फोकस
फोकस चादरों के बैक्टीरिया फ्री होने पर है। इसके लिए कंपनी को अस्पताल के अंदर अपना प्लांट लगाना होगा। अस्पताल प्लांट के लिए स्थान देने के साथ बिजली-पानी आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। कामकाज का साप्ताहिक परीक्षण होगा और लापरवाही पर ठेका निरस्त कर दिया जाएगा। हर अस्पताल के लिए एक प्रबंधक व सुपरवाइजर के साथ अलग टीम होगी।
इन जिलों से शुरुआत
सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, बरेली, मुरादाबाद, रामपुर, झांसी, बदायूं, इटावा, आगरा, मैनपुरी, अलीगढ़, मथुरा, फीरोजाबाद, कानपुर नगर, कन्नौज, हमीरपुर, फतेहपुर, बांदा, उन्नाव, लखनऊ, फैजाबाद, बहराइच, हरदोई, गोंडा, अंबेडकरनगर, सुलतानपुर, जौनपुर, मीरजापुर, इलाहाबाद, रायबरेली, वाराणसी, गोरखपुर, कुशीनगर, आजमगढ़, बस्ती।
हरियाली भी होगी 
अस्पतालों को आकर्षक बनाने के लिए वहां हरियाली की भी तैयारी है। 150 अस्पतालों में छोटे-छोटे बगीचे विकसित किये जाएंगे, ताकि मरीजों को अच्छा वातावरण मिल सके। -आलोक कुमार, निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
गुणवत्ता में समग्र सुधार
यह परियोजना निश्चित रूप से गुणवत्ता में सुधार लाएगी। 50 अस्पतालों के बाद इसे सभी अस्पतालों में लागू किया जाएगा।  -अरविंद कुमार, प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य)

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