Thursday, 28 July 2016

मेरठ-गाजियाबाद के 16 कालेजों ने किया छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़ा


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शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाला
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- बीबीए व बीसीए में प्रवेश दिखाकर करोड़ों रुपये हड़पे
- प्रमुख सचिव ने दिये तीन शैक्षिक सत्रों की जांच के आदेश
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अब मेरठ व गाजियाबाद के 16 कालेजों द्वारा बीबीए व बीसीए में फर्जी प्रवेश दिखाकर करोड़ों रुपये हड़पने का मामला प्रकाश में आया है। समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव ने पिछले तीन शैक्षिक सत्रों की जांच के आदेश दिये हैं।
हाल ही में सहारनपुर में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाला सामने आने पर वहां तैनात रहे दो जिला समाज कल्याण अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। अब मेरठ व गाजियाबाद के 16 कालेजों द्वारा ऐसी ही गड़बड़ी किये जाने की बात सामने आयी है। समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव ने इस मामले में विभाग के संयुक्त निदेशक एमपी सिंह की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के उपनिदेशक शैलेश श्रीवास्तव, समाज कल्याण विभाग के सम्प्रेक्षा अधिकारी अबुल फजल व समाज कल्याण निदेशालय के वित्त नियंत्रक या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि को सदस्य बनाया गया है। समिति को स्थलीय जांच कर एक माह में शासन को रिपोर्ट देने को कहा गया है।
जारी आदेशों में प्रमुख सचिव ने इन संस्थानों द्वारा की गयी गड़बड़ी का ब्योरा भी दिया है। उसके मुताबिक मेरठ के 14 व गाजियाबाद के दो कालेजों में बीबीए में 1023 विद्यार्थियों का प्रवेश लिया, जिनमें से 441 परीक्षा के समय गायब हो गए। इसी तरह बीसीए में प्रवेश लेने वाले 789 विद्यार्थियों में से 357 ने परीक्षा ही नहीं दी। इसके अलावा प्रबंधन में परास्नातक डिप्लोमा (पीजीडीएम) पाठ्यक्रम में भी संस्थाओं द्वारा फर्जीवाड़ा किये जाने की शिकायत मिली है।
घर तक जाकर करें जांच
प्रमुख सचिव ने वर्ष 2013-14, 2014-15 व 2015-16 के डेटाबेस की जांच विद्यार्थियों के घर के पते पर जाकर भौतिक रूप से जांच करने के निर्देश दिये हैं। इसके अलावा जाति व आय प्रमाण पत्रों का भी तहसील के अभिलेखों से मिलान करने को कहा है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलसचिव से इन विद्यार्थियों के फार्म भरने से लेकर परीक्षाफल तक के कागजात लेकर उनकी जांच भी की जाए।
पहले ओबीसी, फिर एससी
पता चला है कि इन संस्थाओं के विद्यार्थियों ने फर्जी जाति व आय प्रमाण पत्र का उपयोग करते हुए छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया। कुछ ऐसे विद्यार्थियों की जानकारी भी मिली है, जिन्होंने पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थी के रूप में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति ली, फिर अगले वर्ष अनुसूचित जाति (एससी) के विद्यार्थी के रूप में आवेदन किया।
ये हैं सोलह कालेज
मेरठ के एसवीएस मवाना, एपीएस कालेज, एआर इंस्टीट्यूट, बालाजी कालेज ऑफ मैनेजमेंट, भारती विद्यापीठ, देलही कालेज ऑफ मैनेजमेंट, श्रीराम कालेज, महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गौरी विद्यापीठ, प्रेसीडेंसी कालेज, नीलकंठ विद्या पीठ व बीएल एकेडमी। गाजियाबाद के आधुनिक कालेज ऑफ मैनेजमेंट व रॉयल कालेज।

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