Thursday, 28 July 2016

बाइक पर स्टंट या गाड़ी गलत चलाई तो होगी जेल


-परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम से सख्ती बरतने को कहा गया
-मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाना अपराध के दायरे में
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सड़कों पर बाइक सवार युवकों को स्टंट करने का मोह अब छोडऩा होगा। परिवहन विभाग ने बाइक पर स्टंट करने या गलत दिशा में गाड़ी चलाने पर सीधे जेल भेजने की चेतावनी दी है। सख्ती का आलम ये है कि सभी एआरटीओ से लक्ष्य पूरे करने के चक्कर में ट्रकों तक सीमित न रहने को कह दिया गया है।
केंद्र सरकार द्वारा मोटर वाहन अधिनियम में अराजक ड्राइविंग व सड़क पर दुर्घटना का कारक बनने पर सख्ती किये जाने के बाद प्रदेश सरकार ने भी इसे अंगीकार किया है। इसमें किसी भी तरह की दुर्घटना का कारण बनने पर कठोर कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिये गए हैं। स्पष्ट कहा गया है कि खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने, यातायात नियमों का पालन किये बिना ओवरटेक करने, किसी भी तरह के स्टंट करने पर जेल तक भेजने का प्रावधान है। इसमें छह माह तक सजा हो सकती है। जांच के दौरान देखें कि कोई भी ड्राइविंग लाइसेंस के बिना गाड़ी न चलाएं। 16 साल से कम उम्र के बच्चे बिना गियर की और 18 साल से कम उम्र के बच्चे गियर वाली गाड़ी चलाते दिख जाएं, तो उनके अभिभावकों पर कार्रवाई की जाए। कान में इयरफोन लगाकर या मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाने को भी अपराध के दायरे में माना जाएगा। इनके खिलाफ भी खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने के तहत ही कार्रवाई होगी। इसके लिए सभी संभागीय परिवहन अधिकारियों (आरटीओ) को निर्देश जारी कर उनसे हर स्तर पर सख्ती बरतने को कहा गया है। अभी राजस्व का लक्ष्य निर्धारित होने के कारण आरटीओ दुपहिया वाहनों या कार चालकों की ओर ध्यान नहीं देते हैं। अब उनसे इस ओर भी सक्रियता बरतने को कहा गया है।
स्कूलों से करेंगे बात
अपर परिवहन आयुक्त वीके सिंह ने बताया कि स्कूली बच्चों को ले जा रहे वाहन चालकों की अराजकता रोकने के लिए सभी जिलों में एआरटीओ स्कूल प्रबंधकों से बात करेंगे। उनसे कहा जाएगा कि गाडिय़ां या तो कुछ पहले निकलवाई जाएं, या लेट होने पर चालकों पर कार्रवाई न की जाए। कई बार लेट होने पर जल्दी स्कूल पहुंचने के चक्कर में भी चालक गड़बड़ी करते हैं। इसके अलावा खतरनाक ड्राइविंग पर अंकुश के लिए अगस्त के पहले सप्ताह में पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाया जाएगा।

मेरठ-गाजियाबाद के 16 कालेजों ने किया छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़ा


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शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाला
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- बीबीए व बीसीए में प्रवेश दिखाकर करोड़ों रुपये हड़पे
- प्रमुख सचिव ने दिये तीन शैक्षिक सत्रों की जांच के आदेश
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अब मेरठ व गाजियाबाद के 16 कालेजों द्वारा बीबीए व बीसीए में फर्जी प्रवेश दिखाकर करोड़ों रुपये हड़पने का मामला प्रकाश में आया है। समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव ने पिछले तीन शैक्षिक सत्रों की जांच के आदेश दिये हैं।
हाल ही में सहारनपुर में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाला सामने आने पर वहां तैनात रहे दो जिला समाज कल्याण अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। अब मेरठ व गाजियाबाद के 16 कालेजों द्वारा ऐसी ही गड़बड़ी किये जाने की बात सामने आयी है। समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव ने इस मामले में विभाग के संयुक्त निदेशक एमपी सिंह की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के उपनिदेशक शैलेश श्रीवास्तव, समाज कल्याण विभाग के सम्प्रेक्षा अधिकारी अबुल फजल व समाज कल्याण निदेशालय के वित्त नियंत्रक या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि को सदस्य बनाया गया है। समिति को स्थलीय जांच कर एक माह में शासन को रिपोर्ट देने को कहा गया है।
जारी आदेशों में प्रमुख सचिव ने इन संस्थानों द्वारा की गयी गड़बड़ी का ब्योरा भी दिया है। उसके मुताबिक मेरठ के 14 व गाजियाबाद के दो कालेजों में बीबीए में 1023 विद्यार्थियों का प्रवेश लिया, जिनमें से 441 परीक्षा के समय गायब हो गए। इसी तरह बीसीए में प्रवेश लेने वाले 789 विद्यार्थियों में से 357 ने परीक्षा ही नहीं दी। इसके अलावा प्रबंधन में परास्नातक डिप्लोमा (पीजीडीएम) पाठ्यक्रम में भी संस्थाओं द्वारा फर्जीवाड़ा किये जाने की शिकायत मिली है।
घर तक जाकर करें जांच
प्रमुख सचिव ने वर्ष 2013-14, 2014-15 व 2015-16 के डेटाबेस की जांच विद्यार्थियों के घर के पते पर जाकर भौतिक रूप से जांच करने के निर्देश दिये हैं। इसके अलावा जाति व आय प्रमाण पत्रों का भी तहसील के अभिलेखों से मिलान करने को कहा है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलसचिव से इन विद्यार्थियों के फार्म भरने से लेकर परीक्षाफल तक के कागजात लेकर उनकी जांच भी की जाए।
पहले ओबीसी, फिर एससी
पता चला है कि इन संस्थाओं के विद्यार्थियों ने फर्जी जाति व आय प्रमाण पत्र का उपयोग करते हुए छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया। कुछ ऐसे विद्यार्थियों की जानकारी भी मिली है, जिन्होंने पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थी के रूप में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति ली, फिर अगले वर्ष अनुसूचित जाति (एससी) के विद्यार्थी के रूप में आवेदन किया।
ये हैं सोलह कालेज
मेरठ के एसवीएस मवाना, एपीएस कालेज, एआर इंस्टीट्यूट, बालाजी कालेज ऑफ मैनेजमेंट, भारती विद्यापीठ, देलही कालेज ऑफ मैनेजमेंट, श्रीराम कालेज, महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गौरी विद्यापीठ, प्रेसीडेंसी कालेज, नीलकंठ विद्या पीठ व बीएल एकेडमी। गाजियाबाद के आधुनिक कालेज ऑफ मैनेजमेंट व रॉयल कालेज।

Wednesday, 27 July 2016

सातवें वेतन आयोग संग दूर होंगी पांचवें-छठे की विसंगतियां


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- समीक्षा समिति से कर्मचारियों को लाभ के लिए मांगेंगे सुझाव
- घाटे में चल रहे निगमों के पुनरुद्धार या विलय पर भी होगा विचार
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सातवें वेतन आयोग की समीक्षा समिति पांचवें व छठे वेतन आयोग की विसंगतियों पर भी विचार करेगी। कर्मचारी लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे।
केंद्र सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के साथ इस बाबत अधिसूचना भी जारी कर दी है। केंद्रीय कर्मियों को अगले महीने से इसका लाभ मिलने लगेगा। प्रदेश सरकार भी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करने के साथ समीक्षा समिति के गठन का फैसला कर चुकी है। मुख्यमंत्री के पास इस समिति के अध्यक्ष का नाम तय करने संबंधी फाइल वित्त विभाग ने भेजी है, जिस पर जल्द फैसला होने की उम्मीद है। सातवें वेतन आयोग के माध्यम से भले ही 25 फीसद तक औसत वृद्धि का अंदाजा लगाया जा रहा हो, किन्तु राज्य कर्मचारी इससे बहुत संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि अभी तक तमाम विभागों में पांचवें व छठे वेतन आयोग की सिफारिशें भी ठीक से नहीं लागू हो सकी हैं। इन स्थितियों के मद्देनजर वित्त विभाग ने सातवें वेतन आयोग के लिए गठित समीक्षा समिति से पांचवें व छठे वेतन आयोग की विसंगतियों की भी समीक्षा कराने की बात कही है। प्रमुख सचिव (वित्त) राहुल भटनागर ने बताया कि जिन कर्मचारियों को पांचवें या छठे वेतन आयोग से जुड़े लाभ नहीं मिल रहे हैं, उन्हें सातवें वेतन आयोग से किस तरह लाभान्वित किया जा सके, इसके सुझाव भी समीक्षा समिति से मांगे जाएंगे। इसके अलावा समिति से कहा जाएगा कि पांचवें व छठे वेतन आयोग से जुड़ी कैडर संबंधी विसंगतियों का समाधान भी सुझाए। पिछली वेतन समीक्षा समिति के सचिव रहे अजय अग्र्रवाल नयी समीक्षा समिति के भी सदस्य सचिव बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश निगमों के कर्मचारी ही पांचवें व छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के लाभ से वंचित हैं। दरअसल ये निगम घाटे में चल रहे हैं और कर्मचारियों को वेतन वृद्धि के लिए इन निगमों का लाभ में आना जरूरी है। उन्होंने बताया कि समीक्षा समिति इन निगमों के लिए पुनरुद्धार या विलय जैसे प्रस्तावों पर भी विचार करेगी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी का कहना है कि तमाम निगम तो ऐसे हैं, जिनमें घाटा भी नहीं है। उन्होंने मत्स्य निगम का उदाहरण देते हुए बताया कि यह निगम घाटे में नहीं है। साथ ही सलाहकार से लेकर मंत्री तक लाखो रुपये बर्बाद भी कर रहे हैं, किन्तु कर्मचारी चौथे वेतन आयोग में सिमटे हैं। यही स्थिति तमाम अन्य संस्थाओं की है।
चौथे वेतन आयोग पर अटके
अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम, वक्फ विकास निगम, लघु उद्योग निगम, गन्ना बीज विकास निगम, हथकरघा निगम, निर्यात निगम, स्पिनिंग एवं यार्न निगम, मत्स्य विकास निगम
पांचवें वेतन आयोग पर रुके
ड्रग्स एवं फार्मास्युटिकल कम्पनी (पुनरुद्धार प्रस्तावित), उत्तर प्रदेश वित्त निगम

Sunday, 24 July 2016

अस्पताल की चादर साफ सुथरी! हां, भाई हां


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- निजी क्षेत्र को सौंपी जाएगी बेडशीट्स व बिस्तरों की सफाई
- पहले चरण में 37 जिलों के 50 अस्पतालों में होगा अमल
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डॉ.संजीव, लखनऊ :
सरकारी अस्पताल के बारे में सोचते ही जो छवि बनती है, वह फटे गद्दे, गंदी चादरें और मजबूरी में बेड पर लेटने जैसी होती है। प्रदेश सरकार अब जो करने जा रही है, उससे इस छवि में बदलाव आ सकता है। अब स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों की चादरों व बिस्तरों की सफाई निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया है। पहले चरण में 37 जिलों के 50 अस्पतालों में इसी वर्ष से  अमल होगा।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित घोष ने बताया कि उत्तर प्रदेश हेल्थ सिस्टम स्ट्रेंग्थेनिंग प्रोजेक्ट अस्पतालों में 'मैकेनाइज्ड लांड्री' का संचालन निजी क्षेत्र की मदद से कराने का फैसला हुआ है। 50 अस्पतालों में निजी कंपनियों को एक साल के लिए चादरों व बिस्तरों की सफाई का जिम्मा सौंपा जाएगा। उनका  काम ठीक हुआ दो साल के लिए इसे बढ़ाया जाएगा। अभी हाथ से चादरों की धुलाई के कारण सर्वाधिक दिक्कत जाड़ों व बरसात में होती है। मैकेनाइज्ड धुलाई से यह संकट कटेगा। धुली चादरें मिलेंगी तो अस्पताल जनित संक्रमण का खतरा भी घटेगा। इसीलिए चादरों की छंटाई से लेकर जरूरत पर गद्दों की मरम्मत तक का काम निजी कंपनी को सौंपा जाएगा। यह भी निर्देश हैं कि धुले कपड़े वार्ड तक बंद ट्राली में लाए जाएं।
बैक्टीरिया फ्री पर फोकस
फोकस चादरों के बैक्टीरिया फ्री होने पर है। इसके लिए कंपनी को अस्पताल के अंदर अपना प्लांट लगाना होगा। अस्पताल प्लांट के लिए स्थान देने के साथ बिजली-पानी आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। कामकाज का साप्ताहिक परीक्षण होगा और लापरवाही पर ठेका निरस्त कर दिया जाएगा। हर अस्पताल के लिए एक प्रबंधक व सुपरवाइजर के साथ अलग टीम होगी।
इन जिलों से शुरुआत
सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, बरेली, मुरादाबाद, रामपुर, झांसी, बदायूं, इटावा, आगरा, मैनपुरी, अलीगढ़, मथुरा, फीरोजाबाद, कानपुर नगर, कन्नौज, हमीरपुर, फतेहपुर, बांदा, उन्नाव, लखनऊ, फैजाबाद, बहराइच, हरदोई, गोंडा, अंबेडकरनगर, सुलतानपुर, जौनपुर, मीरजापुर, इलाहाबाद, रायबरेली, वाराणसी, गोरखपुर, कुशीनगर, आजमगढ़, बस्ती।
हरियाली भी होगी 
अस्पतालों को आकर्षक बनाने के लिए वहां हरियाली की भी तैयारी है। 150 अस्पतालों में छोटे-छोटे बगीचे विकसित किये जाएंगे, ताकि मरीजों को अच्छा वातावरण मिल सके। -आलोक कुमार, निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
गुणवत्ता में समग्र सुधार
यह परियोजना निश्चित रूप से गुणवत्ता में सुधार लाएगी। 50 अस्पतालों के बाद इसे सभी अस्पतालों में लागू किया जाएगा।  -अरविंद कुमार, प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य)

Wednesday, 20 July 2016

गरीब पिछड़ों की बेटी के ब्याह में मदद होगी समयबद्ध

-आवेदन से स्वीकृति व वितरण तक पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
-मिलेंगे बीस हजार, हर स्तर पर अमल की समय सीमा निर्धारित
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ: गरीब पिछड़ों की बेटी के ब्याह में मदद की घोषणा के बावजूद अफसरों की ढिलाई के कारण हो रहे विलंब पर अंकुश के लिए विभाग ने समयबद्ध कार्ययोजना जारी की है। इस पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद पिछड़े वर्ग के गरीबों को बेटी की शादी के लिए बीस हजार रुपये मिलेंगे।
प्रदेश सरकार ने अप्रैल में पिछड़े वर्ग से जुड़े गरीबों की अधिकतम दो बेटियों की शादी में आर्थिक मदद देने का फैसला किया था। योजना के बाद अफसरों की ढिलाई के कारण अमल न हो पाने की शिकायतें आ रही थीं। इस पर पिछड़ा वर्ग विभाग के सचिव डॉ.हरिओम ने नए सिरे आदेश जारी कर पूरी प्रक्रिया समयबद्ध कर दी है। इसके अनुसार आवेदन से लेकर स्वीकृति व वितरण तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। हर स्तर पर आवेदन के आगे बढऩे व मंजूरी की प्रक्रिया के लिए समय सीमा निर्धारित कर दी गयी है।
यह होगी आय सीमा
आवेदक की आय गरीबी की सीमा के अंतर्गत होनी चाहिए। इसके अनुसार शहरी क्षेत्र में 56,460 रुपये व ग्र्रामीण क्षेत्र में 46,080 रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन व समाजवादी पेंशन पाने वाले आवेदकों को आय प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होगी। अन्य आवेदकों को आवेदन के समय ही आय प्रमाण पत्र लगाना होगा।
निराश्रित व विकलांग को पहले
आवेदकों को तहसील से जारी जाति प्रमाण पत्र का क्रमांक ऑनलाइन आवेदन पत्र में अंकित करना अनिवार्य होगा। विवाह के लिए पुत्री की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी जरूरी है। पति की मृत्यु के उपरांत निराश्रित महिला व विकलांग आवेदक को वरीयता दी जाएगी।
आवेदन की प्रक्रिया निर्धारित
आवेदकों को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन विवाह के 90 दिन पहले से 90 दिन बाद तक करना होगा। आवेदन करते समय ही आइएफएस कोड सहित बैंक खाता संख्या भी बतानी होगी, ताकि सीधे खाते में मदद भेजी जा सके। यह आवेदन सीधे खंड विकास अधिकारी व उपजिलाधिकारी के लॉगइन पर दिखेंगे। इन्हें यह आवेदन सात दिन के भीतर अग्र्रसारित करना होगा। उसके बाद 15 दिनों के भीतर जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सत्यापन आदि की कार्रवाई पूरी कर लेंगे। आवेदन के 21 दिन तक यह प्रक्रिया पूरी न होने पर अधिकारियों को एसएमएस से याद दिलाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अनुश्रवण समिति बनेगी। 

Monday, 18 July 2016

इंजीनियरिंग की पढ़ाई, ट्यूशन का कौशल


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-पूरी दुनिया में श्रेष्ठ शिक्षकों की कमी का उठाएंगे लाभ
-इंजीनियरिंग की पढ़ाई संग सिखाएंगे पढ़ाने का सही तरीका
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डॉ.संजीव, लखनऊ
कानपुर हो या कोटा, आइआइटी जैसे संस्थानों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद युवा कोचिंग पढ़ा रहे हैं। अब प्राविधिक शिक्षा महकमा राज्य के इंजीनयरिंग कालेजों में स्किल डेवलपमेंट के तहत ट्यूशन का कौशल शामिल करने की तैयारी कर रहा है, ताकि अंतर्राष्ट्रीय जरूरतों के साथ भारतीय मेधा का दोहन प्रदेश के विद्यार्थियों के बीच से हो सके।
प्रदेश में ताबड़तोड़ खुले इंजीनियरिंग कालेजों से निकलने वाले विद्यार्थियों को रोजगार के उचित अवसर न मिलने के कारण इनकी लोकप्रियता लगातार घट रही है। हालत ये हैं कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) की काउंसिलिंग के दो चक्र पूरे होने के बाद भी बीटेक में बमुश्किल बीस हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है और 80 फीसद से अधिक सीट्स खाली हैं।
प्राविधिक शिक्षा विभाग ने इस समस्या से निपटने के लिए विद्यार्थियों के कौशल विकास पर फोकस करने की तैयारी की है। इसमें भी दुनिया भर में जिस तरह के कौशल की जरूरत है, उसे चिह्नित कर विद्यार्थियों को उससे जोडऩे का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस बाबत राजधानी लखनऊ स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आइईटी) के शिक्षकों से अध्ययन कराया गया तो पूरी दुनिया में गणित व विज्ञान विषयों के अच्छे शिक्षकों की कमी बड़े विषय के रूप में सामने आयी। आकलन में पता चला कि ऑनलाइन शिक्षा देने का बड़ा प्लेटफार्म है किंतु गणित व विज्ञान में चैम्पियन होने के बावजूद सूबे के इंजीनियरिंग छात्र-छात्राएं करियर के लिए इस दिशा में आगे नहीं बढ़ पाते हैं। आइआइटी या एनआइटी आदि से निकलने वाले मेधावी तो सिर्फ कोचिंग पढ़ाकर ही लाखों रुपये कमा रहे हैं। तय हुआ कि इंजीनियरिंग कालेजों में पढ़ाई के साथ ट्यूशन का कौशल भी विकसित किया जाए। प्राविधिक शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव मोनिका एस गर्ग ने इस दिशा में आगे बढऩे और व्यापक प्रस्ताव बनाने की पहल की है। अब इन विद्यार्थियों को उपयुक्त मंच प्रदान करने पर सहमति बन चुकी है। उन्हें अंतर्राष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप अपडेट किया जाएगा और इसके लिए विशेष मॉड्यूल्स भी बनाए जा रहे हैं। इन मॉड्यूल्स में पूरा फोकस अच्छी अंग्र्रेजी के साथ विद्यार्थियों की कम्युनिकेशन स्किल्स सुधारने पर होगा। जल्द ही कैबिनेट के समक्ष पूरा प्रस्ताव लाया जाएगा, ताकि परियोजना को औपचारिक रूप दिया जा सके।
बनेगा ऑनलाइन प्लेटफार्म
इस पूरी परियोजना को एक ऑनलाइन प्लेटफार्म पर सभी (सरकारी व निजी) इंजीनियरिंग कालेजों के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। विश्वविद्यालय स्तर पर उनका यूजर आइडी बनाया जाएगा, ताकि वे इससे जुड़ सकें। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जरूरत के अनुरूप उन्हें ऑनलाइन ट्यूशन के अवसर मिलेंगे। अभी एकेटीयू को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी, भविष्य में इस पूरी परियोजना को कानपुर की ट्रांसगंगा सिटी में प्रस्तावित कौशल विकास विश्वविद्यालय के साथ जोड़ दिया जाएगा।

Sunday, 17 July 2016

'ठंडी' रोडवेज बस में अब कम 'ठंडी' होगी जेब


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-सीटें बढ़ाकर एसी बसों का किराया कम करने की तैयारी
-शताब्दी व जनरथ के बाद तीसरी एसी बस सेवा का प्रस्ताव
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डॉ.संजीव, लखनऊ
उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम (रोडवेज) की एयरकंडीशंड (एसी) यानी 'ठंडी' बसों में यात्रा के लिए अब यात्रियों की जेब कम 'ठंडी' होगी। रोडवेज शताब्दी व जनरथ के बाद तीसरी एसी बस सेवा शुरू करने की तैयारी में है। अधिक सीटों के साथ इस सेवा की बसों का किराया कम रखने का लक्ष्य है।
रोडवेज में इस समय दो तरह की एसी बस सेवा संचालित हो रही है। एक तो प्रीमियम क्लास शताब्दी बस सेवा है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर की वाल्वो या स्कैनिया जैसी बसें चल रही हैं। अभी इस बस सेवा का प्रयोग लंबी दूरी के रूट्स पर होता है और रोडवेज प्रबंधन इसे खासा सफल भी मानता है। एसी सेवा में विस्तार देते हुए जनरथ बस सेवा की शुरुआत हुई थी। जनरथ सेवा का किराया शताब्दी से कम रखा गया तो इसकी लोकप्रियता भी बढ़ी। अब इसे और विस्तार देने की तैयारी है। अभी जनरथ बसों में कुल 40 सीटें 'टूबाइटू' यानी दोनों ओर दो-दो सीटों की व्यवस्था के साथ होती हैं। रोडवेज प्रबंधन ने प्रस्तावित नई बस सेवा का किराया और कम करने के लिए इसमें 25 फीसद सीटें बढ़ाने की तैयारी की है। इसमें एक ओर तीन और दूसरी ओर दो सीटों के साथ 'थ्रीबाइटू' प्रणाली के अनुरूप सीटें लगाकर कुल 50 सीटों की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि लगातार एसी बसों की मांग बढ़ रही है, इसलिए सीटें बढ़ाकर चल रही बसें सफल भी होंगी। इन पर प्रति यात्री खर्च कम होने से किराया भी घटेगा, जिससे अधिक यात्री लाभान्वित होंगे। रोडवेज प्रबंधन ने 45 करोड़ रुपये खर्च कर ऐसी 150 बसें बनाने को हरी झंडी दे दी है। इनकी सफलता के बाद बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
15 फीसद तक कम किराया
अभी शताब्दी बस से यात्रा में 2.25 रुपये प्रति किलोमीटर और जनरथ बस सेवा में 1.23 रुपये प्रति किलोमीटर किराया पड़ता है। नई बस सेवा में जनरथ की तुलना में 25 फीसद सीटें बढ़ेंगी। ऐसे में इस सेवा में किराया 15 फीसद तक कम रहने की उम्मीद है। रोडवेज प्रबंध निदेशक आशीष गोयल ने बताया कि इन बसों का किराया निश्चित रूप से जनरथ बसों से कम होगा। लागत व अन्य खर्चों का पूरा आकलन करने के बाद किराये को अंतिम रूप दिया जाएगा।
कार्यशालाओं में प्रतिस्पर्द्धा
रोडवेज प्रबंध निदेशक ने बताया कि पहले चरण में ऐसी 150 बसें बनाने की तैयारी है। अभी रोडवेज के बेड़े में शताब्दी व जनरथ मिलाकर 280 एसी बसें हैं। यह सेवा चालू हो जाने के बाद रोडवेज के बेड़े में एसी बसों की संख्या 430 हो जाएगी। इनके निर्माण के लिए रोडवेज की कानपुर स्थित दोनों कार्यशालाओं में प्रतिस्पपर्द्धा कराई जाएगी। जिस कार्यशाला से बनी बस कम लागत में ज्यादा अच्छी बनेगी, उसे पुरस्कार भी दिया जाएगा।
पूर्वांचल पर रहेगा फोकस
इन बसों के संचालन के लिए क्षेत्रीय प्रबंधकों व सेवा प्रबंधकों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। उनसे अपने क्षेत्रों में प्रस्तावित बसों के बारे में उपादेयता की जानकारी भी मांगी गयी है। वैसे प्रबंध निदेशक का कहना था कि इन बसों के संचालन में पूर्वांचल पर फोकस रहेगा। वहां निजी क्षेत्र की एसी बसें कम चलती हैं, इसलिए ये बसें पूर्वांचल से जुड़े जिलों में अधिक संख्या में चलायी जाएंगी। 

Wednesday, 13 July 2016

बस से जाओ, काम करो और घर लौटो


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-रोडवेज इसी माह लांच करेगी रैपिड लाइन बस सर्विस
-सभी महानगरों व प्रमुख शहरों को जोड़ेंगी 203 बसें
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डॉ.संजीव, लखनऊ : आपको अपने घर के आसपास के किसी महानगर या अन्य शहर में कोई काम है और वहां रुकना भी नहीं चाहते, तो इसी माह लांच हो रही रोडवेज की रैपिड लाइन बस सर्विस राह आसान कर देगी। यह सेवा सभी महानगरों व प्रमुख शहरों को सीधे जोडऩे के साथ उसी दिन अनिवार्य वापसी वाली होगी, ताकि लोग बस से जाकर अपना काम निपटाते हुए घर लौट सकें। 203 बसों से इस सेवा की शुरुआत होगी।
पूरे प्रदेश में रोडवेज की बसें तो चलती हैं किंतु दो शहरों के बीच डेडिकेटेड (समर्पित) बस सेवा अभी बहुत प्रभावी नहीं है। उसमें भी बसों का संचालन समयबद्ध ढंग से न होने से दिक्कत आती है। परिवहन निगम ने अब इस समस्या से मुक्ति के लिए रैपिड लाइन बस सेवा की पहल की है। सभी प्रमुख महानगरों को जोड़ते हुए ऐसी बसें चलाई जाएंगी, जो सुबह रवाना हों और शाम को हर हाल में वापस आ जाएं। पहले चरण में 203 सामान्य बसें चलाई जाएंगी और इनका किराया भी मौजूदा दरों पर होगा। ये बसें चिह्नित कर चालकों व परिचालकों की ड्यूटी लगाने का काम भी पूरा कर लिया गया है। निर्धारित रूट पर पडऩे वाले सभी जिला मुख्यालयों में बसें रुकेंगी और वहां बस पहुंचने व लौटने का समय भी निर्धारित कर दिया गया है। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी रोकने के लिए पूरी सेवा पर मुख्यालय से ऑनलाइन नजर रखी जाएगी।
औसतन 200 किमी का रूट
इस बस सेवा को सुविधापूर्ण बनाने के लिए औसतन 200 किलोमीटर का रूट बनाया गया है। कुछ रूट 250 किमी तक होंगे तो कुछ 175 किमी तक के भी हो सकते हैं। राजधानी लखनऊ से इलाहाबाद, आजमगढ़, बहराइच व बलरामपुर के लिए बसें चलेंगी तो पूर्वांचल में गोरखपुर से वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़ को जोड़ा जाएगा। बुंदेलखंड में झांसी-कानपुर, बांदा-लखनऊ, चित्रकूट-लखनऊ जैसे रूट बनाए गए हैं तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगरा, मेरठ, सहारनपुर व मुरादाबाद को जोड़ा गया है।
आठ बजे प्रस्थान, चार बजे वापसी
चिह्नित स्थानों से ये बसें सुबह आठ बजे चलेंगी। औसतन चार घंटे की यात्रा के बाद ये बसें हर हाल में दोपहर 12 बजे तक अंतिम गंतव्य तक पहुंच जाएंगी। लोगों के पास अपने तात्कालिक काम निपटाने के लिए चार घंटे का समय होगा। वहां से ये बसें सायं 4 बजे वापस चलेंगी और रात आठ बजे तक प्रस्थान स्थल पर वापस पहुंच जाएंगी।
25 को उद्घाटन
रैपिड लाइन सेवा रोडवेज की महत्वाकांक्षी योजना है। इससे दैनिक यातायात की जरूरतें पूरी होंगी और यात्रियों को अधिकाधिक लाभ मिल सकेगा। इसके मार्गों आदि को अंतिम रूप देकर बसें भी चिह्नित कर ली गयी हैं। 25 जुलाई को इसका औपचारिक उद्घाटन होगा। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गयी है।
-आशीष गोयल, प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम

छुट्टियों में भी चैन से नहीं बैठेंगे इंजीनियरिंग विद्यार्थी


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-अब पहले व दूसरे साल भी उद्योगों के साथ प्रोजेक्ट का प्रस्ताव
-तीसरे और चौथे साल व्यक्तित्व विकास के लिए विशेष पाठ्यक्रम
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सूबे के सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों के विद्यार्थी अब छुट्टियों में भी चैन से नहीं बैठेंगे। सेवायोजन के मौके बढ़ाने के लिए उन्हें पहले व दूसरे साल भी उद्योगों के साथ प्रोजेक्ट करने होंगे, वहीं तीसरे व चौथे साल व्यक्तित्व विकास के लिए विशेष पाठ्यक्रमों का संचालन किया जाएगा।
इंजीनियरिंग कालेज तो तेजी से खुल गए किंतु प्लेसमेंट न होने से मेधा का रुझान उनकी ओर नहीं है। हालत ये हैं कि इस वर्ष डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय द्वारा प्रदेश के इंजीनियरिंग कालेजों में प्रवेश के लिए कराई गयी परीक्षा के बाद बीटेक तक में प्रवेश के लिए उत्साह नहीं दिख रहा है। सवा लाख सीटों के सापेक्ष महज 15 हजार विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग कालेजों में प्रवेश लिया है। इसके पीछे प्लेसमेंट खराब होना सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। हालात ये हैं कि सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों में शीर्ष पर माने जाने वाले लखनऊ के आइईटी और कानपुर के एचबीटीआइ तक में बीटेक विद्यार्थियों का प्लेसमेंट औसतन 70 फीसद के आसपास सिमट कर रह गया है। अन्य कालेजों की स्थिति तो और खराब है।
प्राविधिक शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव मोनिका एस गर्ग ने बताया कि विद्यार्थियों को एम्प्लायबिलिटी बढ़ाने के लिए उन्हें लगातार व्यस्त रखने व सामान्य पाठ्यक्रम से जुड़ी पढ़ाई के अलावा उद्योगों से उनका जुड़ाव बढ़ाने व व्यक्तित्व विकास के लिए विशेष पाठ्यक्रम संचालित किये जाएंगे। अभी तीसरे वर्ष के बाद विद्यार्थी उद्योगों में विशेष प्रशिक्षण के लिए जाते हैं। अब पहले व दूसरे वर्ष के बाद भी उद्योगों से विद्यार्थियों को जोडऩे का प्रस्ताव है। उद्योग समूह इन विद्यार्थियों का स्वागत करते हैं, बस संस्थानों के प्लेसमेंट सेल को सक्रियता बढ़ानी होगी। इसके लिए निदेशकों को निर्देश दिये गए हैं। तीसरे व चौथे वर्ष में विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन की 'टेक इट' योजना से संबंधित संस्थानों को भुगतान किया जाएगा। वे स्वयं कालेजों का नियमित निरीक्षण करेंगी।

Tuesday, 12 July 2016

अक्टूबर से पहले 'इलाज' की मशक्कत


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-अस्पतालों व मेडिकल कालेजों में निर्माण कार्य हुए तेज
-मुख्यमंत्री सचिवालय से की जा रही नियमित समीक्षा
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश सरकार सेहत के ढांचे को मजबूत कर अक्टूबर से पहले पूरे 'इलाज' की मशक्कत कर रही है। अस्पतालों के निर्माण से लेकर मेडिकल कालेजों के उन्नयन तक, सभी काम समयबद्ध ढंग से पूरे करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सचिवालय से इन सभी कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि समय पर लोकार्पण कराया जा सके।
प्रदेश के सभी नए-पुराने मेडिकल कालेजों में इस समय उन्नयन के साथ निर्माण कार्य चल रहे हैं। विदेश दौरे से लौटने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वयं इन कालेजों में निर्माण आदि की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय इस दिशा में अधिक सक्रिय हो गया है। सभी मेडिकल कालेजों में सीटी स्कैन, एमआरआइ मशीनों की स्थापना 31 अक्टूबर तक हर हाल में कर लेने के निर्देश दिये गए हैं। साथ ही 30 सितंबर से पहले सभी उपकरणों को क्रियाशील करने का लक्ष्य दिया गया है। कानपुर में न्यूरोलॉजी सेंटर व चिकित्सकों के आवासों के निर्माण, आगरा में सर्जरी व एलाइड स्पेशलिटी विभाग का निर्माण व उसमें मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर की स्थापना, झांसी में 500 बेड के अस्पताल भवन का निर्माण व अन्य जीर्णोद्धार, मेरठ में मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, लेक्चर थियेटर व केंद्रीय पुस्तकालय का निर्माण, गोरखपुर में 500 बेड के बाल रोग चिकित्सालय का निर्माण और फार्मेसी व पैरमेडिकल भवनों में पाठ्यक्रमों का नियोजन, इलाहाबाद में ट्रामा सेंटर निर्माण जैसे काम हर हाल में अक्टूबर से पहले पूरे करने के निर्देश दिये गए हैं, ताकि इनका लोकार्पण मुख्यमंत्री से कराया जा सके। इन कार्यों की समयबद्ध निर्माण प्रक्रिया की समीक्षा के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ.अनूप चंद्र पाण्डेय ने बुधवार को सभी प्राचार्यों की बैठक बुलाई है।
स्वास्थ्य विभाग भी जिला व मंडल स्तर पर अस्पतालों के उन्नयन के साथ नए अस्पतालों को अक्टूबर तक हर हाल में शुरू करने के लिए सक्रिय हो गया है। प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरविंद कुमार के मुताबिक प्रदेश के 50 जिला महिला चिकित्सालयों में 100 बेड के मैटरनिटी विंग में से आठ का निर्माण पूरा हो चुका है और 34 विंग का काम अक्टूबर तक हर हाल में पूरा हो जाएगा। शेष आठ का काम भी तेजी से करने के निर्देश दिये गए हैं। इसी तरह 50 बेड के 12 मैटरनिटी विंग भी अगले माह तक हर हाल में पूरे हो जाएंगे। अक्टूबर तक ही 30 बेड के 78 जच्चा-बच्चा अस्पतालों की सक्रियता का लक्ष्य रखा गया है।  जिला व मंडल स्तर पर अस्पतालों में उच्च स्तरीय तकनीकी उपचार सुविधाएं भी अक्टूबर से पहले शुरू हो जाएंगी।

Sunday, 10 July 2016

छह जिलों में जन्मदर 4+, घटाना बड़ी चुनौती


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विश्व जनसंख्या दिवस कल
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- 'संयोग से नहीं, सहमति से बढ़ाएं परिवार' का दिया नारा
- 2020 तक ढाई करोड़ को परिवार कल्याण से जोडऩे का लक्ष्य
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सोमवार को विश्व जनसंख्या दिवस है। प्रदेश की सकल जन्म दर तीन से अधिक होना राज्य स्तर पर तो चुनौती है ही, छह जिले ऐसे हैं, जिनमें जन्म दर चार से अधिक है। प्रदेश सरकार के सामने ये जिले सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। आबादी घटाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'जिम्मेदारी निभाओ, प्लान बनाओ' नारा दिया है तो राज्य में आबादी घटाने की चुनौतियों से निपटने के लिए 'संयोग से नहीं, सहमति से बढ़ाएं परिवार' का नारा दिया गया है।
उत्तर प्रदेश में परिवार नियोजन की तमाम कोशिशें सफल होने का नाम नहीं ले रही हैं। विश्व जनसंख्या दिवस पर एक बार फिर बड़े वादे किये जाएंगे, किन्तु अधिकारी परिवार कल्याण कार्यक्रमों से आम जनमानस के न जुड़ पाने की चुनौती से जूझ रहे हैं। इसीलिए अगले चार वर्ष की कार्ययोजना बनाई गयी है। इस समय प्रदेश के सवा करोड़ लोगों तक परिवार नियोजन से जुड़ी सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 2020 तक यह संख्या बढ़ाकर ढाई करोड़ करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस समय प्रदेश में संतानोत्पत्ति वाले 20 फीसद दंपती किसी भी गर्भ निरोधक साधन का प्रयोग नहीं करते हैं। 2020 तक इसे घटाकर 12.7 फीसद करने का लक्ष्य है, ताकि प्रदेश की जन्मदर 3.1 से घटाकर 2.1 पर पहुंचाई जा सके। इनमें भी छह जिले स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बने हैं। श्रावस्ती, गोंडा, लखीमपुर खीरी, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर व सीतापुर में जन्मदर चार से अधिक है। इसे आधी करने के लिए पंचायत स्तर तक जाकर गर्भ निरोधकों का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
मृत्यु दर भी घटेगी
प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 258 प्रति लाख प्रसव और शिशु मृत्यु दर 48 प्रति हजार है। छोटे और नियोजित परिवार को अपनाकर इसे भी घटाया जा सकेगा। आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण में यह बात बताने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसमें नसबंदी के प्रति प्रेरित करने के साथ परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों का प्रयोग 37.6 फीसद से बढ़ाकर 61.3 फीसद करने पर जोर है।
150 अस्पतालों पर फोकस
स्वास्थ्य विभाग ने 150 अस्पताल चिन्हित किये हैं, जहां हर माह 200 से अधिक प्रसव होते हैं। प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरविंद कुमार ने बताया कि इन अस्पतालों में काउंसिलिंग से लेकर परिवार कल्याण से जुड़ी सभी सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जा रहा है। पूरा जोर इस बात पर है कि दूसरा बच्चा पेट में आने के साथ ही गर्भवती महिला को मानसिक रूप से प्रसव के बाद परिवार नियोजन के लिए तैयार किया जा सके।

Tuesday, 5 July 2016

एसएमएस कर बताएंगे फार्म भरने में हुई गलती


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-पूर्वदशम् व दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में नई पहल
-संदिग्ध पाए जाने वाले आवेदनों में भी मिलेगा मौका
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : पूर्वदशम् व दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में गलत फार्म भरने के कारण लाभ से वंचित रह जाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए अब नई पहल की गयी है। अब फार्म भरने के बाद कोई गलती होने पर विद्यार्थियों के पास एसएमएस से सूचना भेजने का फैसला हुआ है। सुधार का मौका संदिग्ध पाए जाने वाले आवेदनों में भी मिलेगा।
प्रदेश में समाज कल्याण विभाग द्वारा सामान्य व दलित, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा पिछड़े व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति करने का प्रावधान है। इनमें दो लाख रुपये वार्षिक से कम आय वाले विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति की जाती है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए आवेदन प्रक्रिया एक जुलाई से शुरू हो चुकी है। नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को 31 अगस्त और शेष सभी को 30 सितंबर तक का समय आवेदन के लिए मिला है। पिछले वर्ष तक आवेदन के दौरान विद्यार्थियों द्वारा जाति व आय प्रमाण पत्र के क्रमांक से लेकर हाई स्कूल व इंटरमीडिएट के अनुक्रमांक तक गलत भरने जैसी कमियां होने के मामले सामने आते रहे हैं। इस बार ऐसी कमियों से निपटने के लिए विभागों द्वारा दोहरी व्यवस्था की गयी है।
 समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक पीके त्रिपाठी के अनुसार इस बार फार्म पूरा भरने के बाद अंतिम रूप से आवेदन लॉक करने के लिए विद्यार्थियों के स्तर पर भी तीन दिन का समय दिया जाएगा। फार्म भरने के शुरुआती दौर में ही विद्यार्थियों से उनका मोबाइल नंबर भी लिया जाएगा। इसके बाद तीन दिनों में विभागीय स्तर पर जाति व आय प्रमाण पत्र, अंक पत्रों आदि का सत्यापन किया जाएगा। उसमें कोई गलती पकड़े जाने पर विद्यार्थियों को एसएमएस से सूचना दी जाएगी। यही नहीं फार्म को अंतिम रूप से लॉक करने के लिए विद्यार्थी जब ऑनलाइन आएंगे, तो उनकी गलती से जुड़ी जानकारी फ्लैश करेगी, ताकि वे उसे सही कर सकें। यही नहीं फार्म भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एनआइसी व विभाग के स्तर पर संदिग्ध आवेदन चिह्नित किये जाएंगे। इन आवेदनों को पहली नजर में ही खारिज नहीं किया जाएगा। गलती पाए जाने पर एक से दस दिसंबर के बीच विद्यार्थियों व उनके संस्थानों को संदेह समाप्त करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति आवेदनों का अंतिम निस्तारण होगा।
13 लाख से ज्यादा थे वंचित
वित्तीय वर्ष 2015-16 में गलत जानकारी व संदिग्ध पाए जाने के कारण 13 लाख से अधिक विद्यार्थी छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति पाने से वंचित रह गए थे। पिछले वर्ष कुल 1.96 लाख विद्यार्थियों को पूर्वदशम् व 23.55 लाख को दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिला था। 13 लाख से अधिक विद्यार्थी आवेदन में गलतियां व आवेदन संदिग्ध पाए जाने के कारण इसका लाभ नहीं उठा सके थे। एक लाख विद्यार्थी तो केवल प्रमाणपत्र क्रमांक या अनुक्रमांक या खाता संख्या गलत भरने के कारण छात्रवृत्ति से वंचित रह गए थे। 12 लाख के आसपास आवेदन संदिग्ध मिले थे। नई व्यवस्था से इसमें सुधार की उम्मीद है।

Friday, 1 July 2016

अफसर दबाए बैठे सरकारी अनुदान की फाइलें


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-शादी अनुदान व पारिवारिक लाभ देने में एसडीएम-बीडीओ अड़ंगा
-जिलाधिकारियों व मंडलायुक्तों से समीक्षा व हस्तक्षेप को कहा गया
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : अखिलेश सरकार भले ही पारिवारिक लाभ व शादी अनुदान जैसी योजनाओं के विस्तार का दावा करे, किंतु अफसरों की ढिलाई सरकार की छवि खराब करने में पीछे नहीं है। समाज कल्याण विभाग की पड़ताल में पता चला है कि अफसर सरकारी अनुदान की फाइलें दबाए बैठे हैं। अब जिलाधिकारी व मंडलायुक्तों से मामले में हस्तक्षेप को कहा गया है।
सरकार समाज के सभी वर्गों के गरीबों को बेटियों के ब्याह के लिए शादी अनुदान योजना के तहत 20 हजार रुपये व किसी गरीब परिवार के मुखिया की मृत्यु होने पर 30 हजार रुपये अनुदान देती है। इसकी पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गयी है। ग्र्रामीण क्षेत्रों में बीडीओ व शहरी क्षेत्रों में एसडीएम को इन आवेदनों का परीक्षण कर भुगतान सुनिश्चित कराना होता है। समाज कल्याण विभाग ने हाल ही में आंकलन कराया तो पता चला कि एसडीएम व बीडीओ, दोनों स्तर पर इस मामले में घोर लापरवाही की जा रही है। पारिवारिक लाभ योजना के अब तक आए 84,607 आवेदनों में से सिर्फ 2,694 का भुगतान हुआ है। शादी अनुदान योजना के 64,744 आवेदनों में से सिर्फ 898 लोगों को भुगतान किया गया है। शेष लोग प्रतीक्षा में हैं और दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं किंतु उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। इस लापरवाही को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने जिलाधिकारियों व मंडलायुक्तों को पत्र लिखकर अभियान चलाकर इन आवेदनों का निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा है। इसके लिए उनसे बीडीओ व एसडीएम के स्तर पर सीधे व नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।
शाहजहांपुर सबसे पीछे
आवेदनों के निस्तारण में शाहजहांपुर सबसे पीछे है। यहां ग्र्रामीण क्षेत्र में 2912 व शहरी क्षेत्र में 254 आवेदन लंबित हैं। बीडीओ के स्तर पर ढिलाई में शाहजहांपुर के बाद 2591 लंबित आवेदनों के साथ खीरी दूसरे 2258 लंबित आवेदनों के साथ रायबरेली तीसरे स्थान पर है। शहरी क्षेत्र की दृष्टि से एसडीएम के स्तर पर लापरवाही के मामले में शाहजहांपुर से भी आगे फीरोजाबाद व झांसी हैं। फीरोजाबाद के 311 व झांसी के 300 आवेदन एसडीएम के स्तर पर लंबित हैं।
15 दिन में करें निस्तारण
लंबित आवेदनों का निस्तारण 15 दिन में करने के निर्देश दिये गए हैं। ऐसा न करने वाले एसडीएम व बीडीओ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारियों व मंडलायुक्तों को सीधी जिम्मेदारी सौंपी गयी है। -सुनील कुमार, प्रमुख सचिव (समाज कल्याण)