Tuesday, 7 June 2016

पेंशन के लिए नहीं लगाने होंगे कोषागार के चक्कर

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-इस माह के अंत तक सभी जिलों में ऑनलाइन पेंशन प्रणाली
-सेवानिवृत्ति से पहले ही ई-पेंशन पोर्टल पर अपलोड होगा ब्यौरा
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ: प्रदेश के किसी भी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद अब पेंशन के लिए कोषागार के चक्कर नहीं लगाने होंगे। इसी माह सभी जिलों में ऑनलाइन पेंशन स्वीकृति प्रणाली (ई-पेंशन सिस्टम) हर हाल में लागू हो जाएगी।
प्रदेश में दस लाख से अधिक कर्मचारी सरकारी सेवा में हैं। इनके सेवानिवृत्त होने पर पेंशन हर जिले में कोषागार के माध्यम से मिलती है। मौजूदा स्थिति में विभिन्न सरकारी विभागों से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन शुरू होने तक की प्रक्रिया खासी जटिल होती है। कर्मचारियों को तमाम बार कोषागार के चक्कर लगाने होते हैं। प्रदेश सरकार ने दो साल पहले पेंशन स्वीकृति प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का फैसला किया था। जनवरी 2015 से उन्नाव व बाराबंकी में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह प्रक्रिया शुरू की गयी थी। वहां सफलता के बाद सितंबर 2015 से 25 और जिलों में इसे लागू किया गया था। अब शेष 48 जिलों में इस प्रक्रिया को लागू करने का फैसला हुआ है। इस बाबत जारी आदेश में वित्तीय वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही, अर्थात 30 जून 2016 तक हर हाल में इस प्रणाली को अमल में लाने को कहा गया है। आदेश दिये गए हैं कि कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति से पहले उनका पूरा ब्यौरा प्रदेश के ई-पेंशन पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाए। इससे सेवानिवृत्ति के अगले माह से ही सभी कर्मचारियों को पेंशन मिलने लगेगी।
अफसर नहीं लेते रुचि
पेंशन निदेशालय के निदेशक वीकेएल श्रीवास्तव ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर अफसरों द्वारा इस काम में रुचि न लेने पर आपत्ति जाहिर की है। मंडलीय अपर निदेशकों (कोषागार एवं पेंशन) तथा जिला कोषागारों से प्राप्त फीडबैक का हवाला देते हुए कहा है कि कार्यालयाध्यक्ष व आहरण-वितरण अधिकारी पेंशन प्रकरणों को अपलोड कराने में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं। पेंशन प्रकरणों का समय से निस्तारण न हो पाने से ब्याज के रूप में अनावश्यक वित्तीय भार वहन करना पड़ता है।
नामित हों नोडल अधिकारी
पेंशन निदेशालय के संयुक्त निदेशक धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पेंशन प्रकरणों के निस्तारण पर नजर रखने के लिए हर विभाग से राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया है। उनके जिम्मे विभागीय कार्यालयाध्यक्षों व आहरण-वितरण अधिकारियों से समयबद्ध कार्यवाही कराने और ऐसा न होने पर आख्या प्राप्त करने का काम होगा। इसमें विलंब पर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही को भी कहा गया है।

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