Thursday, 30 June 2016

राज्य कर्मचारियों को इसी साल खुश करेगी सरकार


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सातवां वेतन आयोग
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-पहले साल 26,573 करोड़ का अतिरिक्त खर्च
-मुख्यमंत्री के विदेश से लौटते ही गठित होगी समीक्षा समिति
-वेतन-भत्तों, पेंशन में वृद्धि से बढ़ेगा 22,778 करोड़ वार्षिक खर्च
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : केंद्र सरकार द्वारा सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें माने जाने के बाद प्रदेश सरकार भी इसी साल कर्मचारियों को बढ़े वेतन की सौगात देने की तैयारी कर रही है। वित्त विभाग ने पहले साल 26,573 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च का आकलन किया है। मुख्यमंत्री के विदेश से लौटते ही समीक्षा समिति गठन का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष लाया जाएगा।
अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव स्वयं दिसंबर में चुनाव की संभावना जता चुके हैं। ऐसे में राज्य सरकार चुनाव से पहले ही सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू करना चाहेगी। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड ने अक्टूबर में ये संस्तुतियां लागू करने का फैसला कर लिया है, ऐसे में उत्तर प्रदेश के सामने भी अगले चार-पांच माह में ही फैसले की चुनौती है। यही कारण है कि वित्त विभाग से इस बाबत तत्परता बरतने को कहा गया है। वित्त विभाग ने इन संस्तुतियों को लागू करने की स्थिति में आने वाले खर्च का आकलन कर लिया है। वित्त सचिव अजय अग्र्रवाल की अगुवाई में हुए इस आकलन के अनुसार यदि केंद्र की तरह पूरी संस्तुतियां स्वीकार कर ली जाती हैं, तो पहले साल 26,573 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च आएगा। इसके बाद हर साल 22,778 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होगा। इसके लिए मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा समिति को कैबिनेट की मंजूरी मिलनी जरूरी होगी। इसके लिए प्रमुख सचिव (वित्त) रहे आनंद मिश्रा और 30 जून को मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हो रहे आलोक रंजन के नाम की चर्चा भी शुरू हो गयी है। समिति से तीन माह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा जाएगा, ताकि नवंबर तक यहां भी कर्मचारियों को लाभ दिया जा सके।
बजट में थी तैयारी
-पिछले साल के बजट में तीन फीसद वृद्धि कर अनुमानित व्यय का अनुमान
-अन्य भत्तों को यथावत मान महंगाई भत्ता में दस फीसद वृद्धि कर आकलन
-पेंशन मद में छह फीसद वृद्धि कर पिछले वित्तीय वर्ष को बनाया आधार
इस तरह हुआ आकलन
-वित्तीय वर्ष 2016-17 के वर्तमान व्ययभार का आगणन करने के उपरांत सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने के लिए 25 फीसद वृद्धि को आधार बनाया गया।
-वेतन मद व महंगाई भत्ते के योग का 25 फीसद अतिरिक्त व्ययभार माना गया, क्योंकि पुनरीक्षित वेतनमानों में एक जनवरी 2006 का महंगाई भत्ता मूल वेतन में जोड़ दिया जाएगा।
-यह मानते हुए कि अन्य भत्ता कम से कम दो गुना हो जाएगा, अतिरिक्त व्ययभार वर्तमान व्ययभार के बराबर मान लिया गया। पेंशन के मद में 25 फीसद अतिरिक्त व्ययभार जोड़ा गया।
-वेतन मद में राज्य सहायता से अलग-अलग प्रावधान न होने के कारण अन्य भत्ते दोगुने होने की उम्मीद में कुल अनुमानित व्ययभार का 30 फीसद अतिरिक्त व्ययभार माना गया।
-एक जनवरी 2016 से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें माने जाने के चलते वित्तीय वर्ष 2016-17 में 14 माह का अतिरिक्त व्ययभार वहन करना होगा, इसी आधार पर आगणन किया गया।
केंद्र की अधिसूचना का इंतजार
केंद्र सरकार की अधिसूचना आते ही उच्च स्तरीय समीक्षा समिति का प्रस्ताव शासन को भेजेंगे। कोशिश है कि समीक्षा समिति समयबद्ध ढंग से अपनी संस्तुतियां प्रस्तुत करे ताकि इसी साल राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ मिल सके।
-राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव (वित्त)

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