Sunday, 29 May 2016

नीट बनाम सीपीएमटी पर अटका फैसला


-केंद्र की छूट के बावजूद प्रदेश में असमंजस
-उत्तराखंड के भी नीट स्वीकारने से बढ़ा दबाव
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सरकारी मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिए राज्यों द्वारा अपनी प्रवेश परीक्षा कराने या नीट में शामिल होने की छूट का रास्ता खोलने के बावजूद प्रदेश में अभी असमंजस की स्थिति है। आसपास के अन्य राज्यों के बाद उत्तराखंड भी नीट के साथ जाने का फैसला कर चुका है। इससे विद्यार्थी परेशान हैं।
उत्तर प्रदेश के सभी मेडिकल व डेंटल कालेजों में एमबीबीएस व बीडीएस कक्षाओं में प्रवेश के लिए 17 मई को प्रस्तावित सीपीएमटी निरस्त की जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंटरेंस टेस्ट (नीट) की अनिवार्यता के बाद यह फैसला हुआ था। इस बीच केंद्र सरकार ने सरकारी कालेजों के लिए नीट या अपनी प्रवेश परीक्षा में से एक चुनने का विकल्प दे दिया है। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा महकमे की मुख्य सचिव के साथ बैठक हुई और नीट के पक्ष में तर्क देते हुए 25 मई को प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेज दिया गया था। चार दिन बाद भी मुख्यमंत्री कार्यालय से इस पर कोई फैसला नहीं हो सका है।
सीपीएमटी बनाम नीट पर फैसला न हो पाने से प्रदेश के छात्र-छात्राओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्रदेश के सरकारी मेडिकल व डेंटल कालेजों में प्रवेश पाने के लिए डेढ़ लाख छात्र-छात्राओं ने सीपीएमटी का फार्म भरा था। वे सभी छात्र-छात्राएं परेशान हैं। सीपीएमटी निरस्त करते समय उसका फॉर्म भरने वाले छात्र-छात्राओं को शुल्क वापसी का फैसला भी हुआ था। सीपीएमटी का आयोजन करने वाले डॉ.राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद ने शासन से इस बाबत धनराशि मांगने के लिए पत्र भी लिख दिया था। इस बीच सीपीएमटी और नीट में मामला फंसने के कारण वह प्रक्रिया भी रोक दी गयी। नीट-2 की परीक्षा 24 जुलाई को होनी है। इसके लिए सीबीएसई ने ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करने शुरू भी कर दिये हैं। ऐसे में छात्र-छात्राएं परेशान हैं कि वे नीट-2 के लिए आवेदन करें या सीपीएमटी की प्रतीक्षा करें। इस संबंध में प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) डॉ.अनूप चंद्र पाण्डेय ने कहा कि जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा। विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है और उसी के अनुरूप शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।

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