Monday, 30 May 2016

प्रोन्नति के लिए खत्म होगा खाली पद का इंतजार


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-आयुर्वेद कालेज बचाने को बदलेगी सेवा नियमावली
-सीसीआइएम ने छीन रखी है छह कालेजों की मान्यता
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डॉ.संजीव, लखनऊ
आयुर्वेद कालेजों की मान्यता बचाने के लिए आयुर्वेद शिक्षा सेवा नियमावली बदलने का फैसला हुआ है। अब शिक्षकों को प्रोन्नति के लिए खाली पदों का इंतजार नहीं करना होगा। इसके लिए शासन को भेजे गए प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के समक्ष रखने की तैयारी है।
प्रदेश के सरकारी आयुर्वेदिक कालेज मान्यता संकट से जूझ रहे हैं। इससे निपटने के लिए आयुर्वेदिक शिक्षकों की सेवा नियमावली बदलने का फैसला हुआ है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआइएम) की शर्तों के अनुरूप बदलाव को हरी झंडी दे दी है। इनमें सबसे बड़ा बदलाव अनिवार्य प्रोन्नति के रूप में होगा। अभी प्रोन्नति के लिए पद रिक्त होने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। नयी नियमावली में पद रिक्ति की अनिवार्यता समाप्त कर दी गयी है। अब लेक्चरर के रूप में मूल नियुक्ति के तीन साल बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में पदोन्नति मिल जाएगी। इसके तीन वर्ष (कुल छह वर्ष) बाद एसोसिएट प्रोफेसर और फिर पांच वर्ष बाद प्रोफेसर के रूप में प्रोन्नति हो जाएगी। सीसीआइएम की अन्य शर्तों को सीधे अंगीकार करने की बात भी नयी नियमावली में शामिल की गयी है। प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) डॉ.अनूप चंद्र पाण्डेय ने बताया कि सीसीआइएम की शर्तों का अनुपालन आसान करने को जल्द ही इस पर फैसला होगा।
छह कालेजों में सत्र शून्य
लखनऊ, पीलीभीत, बांदा, झांसी, बरेली, मुजफ्फर नगर, इलाहाबाद व वाराणसी के आयुर्वेदिक कालेजों में बीएएमएस की 320 सीटें हैं। पिछले वर्ष सीसीआइएम ने लखनऊ व वाराणसी की 90 सीटों को सशर्त मंजूरी दी और शेष की मान्यता ही छीन ली। इससे शैक्षिक सत्र 2015-16 में छह कालेजों में सत्र शून्य हो गया।
आठ प्राचार्य, 550 शिक्षक मांगे
विभाग ने प्रस्ताव के साथ आठ प्राचार्यों व 550 शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति की बात भी कही है। इस बाबत उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेजा जा चुका है। इस समय चार कालेज तो पूरी तरह कार्यवाहक प्राचार्यों के सहारे चल रहे हैं। दो प्राचार्य निदेशालय में तैनात हैं और दोहरा कार्यभार होने के कारण कामकाज भी निश्चित रूप से प्रभावित होता है।

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