Tuesday, 24 May 2016

...तो उप्र में सीपीएमटी की जरूरत ही नहीं!

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-चिकित्सा शिक्षा महकमे में उठ रहे नीट के पक्ष में स्वर
-अध्यादेश का इंतजार, शासन को बताएंगे फायदा-नुकसान
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : मेडिकल व डेंटल कालेजों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तावित नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंटरेंस टेस्ट (नीट) के पक्ष में चिकित्सा शिक्षा महकमे में भी स्वर उठ रहे हैं। केंद्र द्वारा अध्यादेश जारी कर राज्यों को फैसला लेने की छूट दिये जाने के बाद शासन को फायदा-नुकसान का विश्लेषण कर जानकारी देने की तैयारी है। वैसे उत्तर प्रदेश में सीपीएमटी की जरूरत न होने के तर्क भी दिये जा रहे हैं।
नीट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश ने इस वर्ष नीट की अनिवार्यता का विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश ने सीपीएमटी रद कर दिया था। अब इस मसले पर केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश जारी कर सरकारी कालेजों के लिए अपनी परीक्षा कराने की छूट दिये जाने के बाद सीपीएमटी पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गयी है। इस बीच प्रदेश में विद्यार्थियों द्वारा नीट के समर्थन में खड़े होने की सूचनाएं भी मिल रही हैं। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा महकमे के कुछ अफसर सीपीएमटी की जरूरत को ही खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन राज्यों ने नीट का विरोध कर अपनी परीक्षा कराने की बात कही थी, उनका बड़ा तर्क नीट के पर्चे की भाषा को लेकर था। केंद्र सरकार ने अध्यादेश के पक्ष में भी यही तर्क सबसे ऊपर रखा है। अब कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में तो हिंदी व अंग्र्रेजी में ही पर्चे होते हैं और नीट इन दोनों भाषाओं में होगी। ऐसे में यहां सीपीएमटी की जरूरत ही नहीं है। नीट के माध्यम से प्रवेश लेने पर छात्र-छात्राओं को अधिक परीक्षा से मुक्ति मिल जाएगी।
चिकित्सा शिक्षा विभाग में मंगलवार को इस मसले पर कई दौर चर्चा हुई। देर शाम तक अध्यादेश की प्रति न मिलने के कारण इस पर कोई फैसला नहीं हो सका। बुधवार तक अध्यादेश जारी होने की उम्मीद है। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग शासन को सीपीएमटी पर विस्तृत प्रस्ताव भेजेगा। वैसे सूत्रों के मुताबिक विभाग के भीतर सीपीएमटी के खिलाफ स्वर उठने के कारण अब शासन को दोनों पहलुओं पर विस्तृत प्रस्ताव भेजा जाएगा। बताया जाएगा कि छात्र-छात्राएं भी नीट ही चाहते हैं। यदि अब सीपीएमटी कराई गयी तो जुलाई से पहले नहीं हो पाएगी, इसलिए नीट के माध्यम से सूबे के सरकारी कालेजों में प्रवेश का विकल्प खुला है। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ.वीएन त्रिपाठी ने बताया कि अध्यादेश आने के बाद ही शासन स्तर पर कोई फैसला हो सकेगा।

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