Thursday, 28 April 2016

इल्जामों के फंदे में वाहनों की पहचान!


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-फिर रुक गयी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट्स के टेंडर की प्रक्रिया
-अगले सप्ताह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति करेगी विचार
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सूबे के वाहनों को पहचान देने वाली हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट इल्जामों के फंदे में जकड़ती जा रही है। कुछ माह पूर्व परिवहन विभाग द्वारा नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तमाम शिकायतें आ गयी हैं। इस पर मामला मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित हाई पावर कमेटी को सौंपा गया है।
केंद्र सरकार ने देश भर में वाहनों में नंबर प्लेट्स को एकरूपता देने व उनकी विशिष्टता सुनिश्चित करने के लिए 2001 में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लागू करने का फैसला किया था। अधिकांश पड़ोसी राज्यों में हाई सिक्योटिरी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य भी किया जा चुका है। वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की मुहिम शुरू हुई थी किंतु उसमें इस कदर भ्रष्टाचार के आरोप लगे कि एक आइएएस सहित कई अफसर फंस गए थे। तब हाईकोर्ट ने मामले की सीबीआइ जांच के आदेश दिये थे। इसके बाद पूरी टेंडर प्रक्रिया ही निरस्त कर दी गयी थी।
बीते वर्ष 10 नवंबर को परिवहन आयुक्त ने एक बार फिर इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कराई। 4 जनवरी तक टेंडर भी मांगे गए थे। यही प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही तमाम शिकायतों के साथ प्रश्नचिह्न लगा दिये गए। अब अधिकारी पुरानी टेंडर प्रक्रिया पर यह व्यवस्था लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। परिवहन आयुक्त के.रविन्द्र नायक ने बताया कि शिकायतें आने पर टेंडर प्रक्रिया स्थगित कर दी गयी है। सभी शिकायतों का परीक्षण करा रहे हैं। इस बार शत प्रतिशत छानबीन के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। शिकायतों पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित हाई पॉवर कमेटी विचार करेगी। अगले सप्ताह इस कमेटी की बैठक होगी। कमेटी के फैसले के बाद ही आगे की कार्रवाई निर्धारित की जाएगी।
हाईकोर्ट उठा चुका सवाल
उत्तर प्रदेश में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट व्यवस्था न लागू करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट भी सवाल उठा चुका है। इसी वर्ष फरवरी में याचिका की सुनवाई करते समय मुख्य न्यायाधीश डॉ.डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि यहां हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का प्रावधान क्यों नहीं है? कहा गया था कि इसके अभाव में ही लोग अराजकता करते हुए मनमाने ढंग से नंबर प्लेट लगवाते हैं और उसमें कुछ भी लिखवा लेते हैं।

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