Sunday, 17 April 2016

बदली प्रोन्निति पर लाभ की नीति

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-अंतिम आहरित की जगह अंतिम निर्धारित वेतन बनेगा आधार
-दस हजार से अधिक पेंशनरों को मिलेगा बदली नीति का लाभ
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : राज्य सरकार ने पुनरीक्षित वेतन के लाभ देने के मामले में नीति बदली है। अब अंतिम आहरित वेतन के स्थान पर अंतिम निर्धारित वेतन को आधार बनाकर एरियर व पेंशन आदि का निर्धारण होगा।
प्रदेश में कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग का लाभ जनवरी 2006 से देने का आदेश दिसंबर 2008 में जारी किया गया था। इसमें तय हुआ था कि एक दिसंबर 2008 या प्रोन्नति की तिथि से नये वेतनमान का लाभ मिलेगा। तमाम ऐसे कर्मचारी ऐसे भी थे, जो सेवानिवृत्त हो गए और उन्हें पुरानी तारीख से लाभ नहीं मिला। इस पर पेंशनर्स व राज्य कर्मचारियों की ओर से सिविल सर्विसेज विनियमावली में संशोधन की मांग की जा रही थी। राज्य संयुक्त संयुक्त परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव के मुताबिक पेंशनर्स को अंतिम आहरित वेतन को आधार बनाकर पेंशन दिये जाने से वे उन्हें एक जनवरी 2006 से रिवाइज वेतनमान के आधार पर पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था। तमाम वार्ताओं व आंदोलनों में भी यह मुद्दा उठा।
प्रमुख सचिव (वित्त) राहुल भटनागर ने उत्तर प्रदेश सिविल सेवा (संशोधन) नियमावली, 2016 जारी कर इसे तुरंत लागू करने के निर्देश दिये हैं। इसके अंतर्गत प्रोन्नति पर लाभ की पूरी नीति ही बदल दी गयी है। अब अंतिम आहरित वेतन के स्थान पर अंतिम निर्धारित वेतन को आधार बनाकर पेंशन की गणना की जाएगी। कई बार सेवानिवृत्ति के समय तक प्रोन्नत वेतनमान नहीं दिये जाने के कारण उसे पुरानी तिथि से प्रोन्नत माना जाता है। नई नियमावली में पेंशन निर्धारित करते समय प्रोन्नत वेतनमान मिलने की तारीख को आधार बनाकर उसका निर्धारण किया जाएगा। इस आदेश के बाद कोषागार निदेशक लोरिक यादव ने सभी जिला कोषागारों को नयी व्यवस्था के तहत पेंशन पुनरीक्षित करने व तदनुरूप एरियर देने के निर्देश जारी किये हैं। प्रदेश में दस हजार से अधिक पेंशनरों को इस परिवर्तन का लाभ मिलने की उम्मीद है। 

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