Wednesday, 20 April 2016

नर्स-एएनएम 'बर्थ अटेंडेंट', सीएमओ होंगे 'एक्जीक्यूटिव'


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-अभी महज 30 प्रतिशत नर्स प्रशिक्षित
-आइआइएम-एसजीपीजीआइ से मदद
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डॉ.संजीव, लखनऊ
स्वास्थ्य विभाग अब सुरक्षित प्रसव के लिए नर्स व एएनएम का 'मेकओवर' करने जा रहा है। इसके तहत उन्हें प्रशिक्षण देकर 'बर्थ अटेंडेंट' के रूप में तैयार किया जाएगा। सीएमओ, सीएमएस आदि वरिष्ठ सरकारी डॉक्टरों को प्रबंधन का प्रशिक्षण देकर उन्हें 'एक्जीक्यूटिव' बनाया जाएगा।
प्रदेश में परिवार कल्याण कार्यक्रमों को रफ्तार देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रसव के स्तर पर सर्वाधिक सतर्कता बरतने का फैसला किया है। इसके अंतर्गत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने की मुहिम तो चल रही है किन्तु प्रशिक्षित स्टॉफ न होने के कारण दिक्कत होती है। 24 घंटे चिकित्सकों की उपलब्धता संभव नहीं होती और नर्स व एएनएम प्रशिक्षित नहीं हैं। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार महज 30 फीसद नर्स व एएनएम ही प्रसव के लिए पूर्णतया प्रशिक्षित हैं। अब इन नर्स व एएनएम का 'मेकओवर' कर उनके कामकाज में आमूलचूल बदलाव लाने की तैयारी है। उन्हें 'बर्थ अटेंडेंट' के रूप में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पर तात्कालिक रूप से 2.64 करोड़ रुपये मंजूर कर दिये गए हैं और पूरे कार्यक्रम में पैसे की कमी न पडऩे देने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग की तकनीकी सहयोग इकाई के मुखिया विकास गोथलवाल के मुताबिक इन प्रशिक्षण केंद्रों में नर्स व एएनएम को हर परिस्थिति में सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना सिखाया जाएगा। वे महज चिकित्सकों की सहयोगी न बनकर प्रसूता की सहयोगी के रूप में सक्रिय रहेंगे। तकनीक व अन्य पहलुओं की भी पूरी जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण के मोर्चे पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) व अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) भी अपग्र्रेड किये जाएंगे। इस स्तर पर पहुंचने वाले चिकित्सक प्रबंधकीय मसलों में पूरी तरह तैयार नहीं होते हैं जबकि निजी क्षेत्र के अस्पतालों में इनकी भूमिका 'एक्जीक्यूटिव' यानी अधिशासी की होती है। प्रदेश के सभी सीएमओ व डेढ़ सौ से अधिक सीएमएस को पहले चरण में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनके लिए 'हेल्थ केयर एक्जीक्यूटिव मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्र्राम' का प्रस्ताव है। इसके लिए शासन ने डेढ़ करोड़ रुपये भी मंजूर कर दिये हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक आलोक कुमार के मुताबिक इस प्रशिक्षण का मॉड्यूल एसजीपीजीआइ व आइआइएम सहित देश के प्रमुख चिकित्सा व प्रबंधन संस्थानों की मदद से तैयार किया जाएगा। इसकी मदद से सीएमओ व सीएमएस की प्रबंधकीय क्षमता निखारी जाएगी और उन्हें प्रबंधन के गुर सिखाए जाएंगे। इसकी शुरुआत भी इसी साल करने का प्रस्ताव है।
हर जिले में प्रशिक्षण केंद्र
नर्स व एएनएम को प्रभावी भूमिका में लाने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना करने का फैसला हुआ है। इनकी स्थापना के लिए सरकार ने 1.14 करोड़ रुपये मंजूर कर दिये हैं। इन प्रशिक्षण केंद्रों में नर्स व एएनएम के लिए 21-21 दिन के प्रशिक्षण मॉड्यूल बनाए जाएंगे। छोटे मॉड्यूल से प्रशिक्षण भी समयबद्ध ढंग से पूरा हो जाएगा और उनका कामकाज भी प्रभावित नहीं होगा।

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