Wednesday, 30 March 2016

फायदे में आने को सेंसर लगा रोकेंगे डीजल चोरी


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-रोडवेज की सभी बसों में हाईटेक बंदोबस्त की तैयारी
-इंडियन ऑयल की पहल पर साल भीतर अमल को मंजूरी
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डॉ.संजीव, लखनऊ
बसों में डीजल चोरी रोककर रोडवेज को फायदे में लाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने सभी रोडवेज बसों में सेंसर लगाने जैसे हाईटेक बंदोबस्त की तैयारी की है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के प्रस्ताव पर साल भीतर अमल को मंजूरी मिल गयी है।
रोडवेज इस समय प्रदेश में 9500 बसों का संचालन कर रहा है। अलग-अलग रूट्स के हिसाब से इनमें डीजल की खपत होती है। वर्षों से इनमें डीजल चोरी की शिकायतें मिल रही थीं। इस कारण होने वाले घाटे से उबरने के लिए अब रोडवेज प्रबंधन ने इंडियन ऑयल की मदद से इन सभी बसों में सेंसर लगाने का फैसला किया है। तय हुआ है कि रोडवेज के इंटीग्र्रेटेड ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) की टीम इस पूरी परियोजना को अमल में लाएगी। इस पर आने वाला खर्च सोशल कॉरपोरेट रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) मद में इंडियन ऑयल द्वारा उठाया जाएगा। एक साल के भीतर रोडवेज की सभी बसों में यह सेंसर लगाने का लक्ष्य आइटीएमएस टीम पूरा कर लेगी। इसके लिए लखनऊ स्थित परिवहन निगम मुख्यालय में मुख्य नियंत्रण कक्ष और क्षेत्रीय कार्यालयों में उप नियंत्रण कक्ष बनाए जाएंगे। सभी तथ्य ऑनलाइन नियंत्रण कक्षों में पहुंचेंगे, जहां विश्लेषण कर डीजल चोरी का आकलन किया जाएगा। इसमें हर बस के लिए अलग-अलग पता चल सकेगा कि उसमें एवरेज के अनुसार कितना ईंधन खर्च किया और कितनी गड़बड़ी हुई है। इसके बाद जिम्मेदारी निर्धारित कर प्रशासनिक विभाग को सौंप दी जाएगी, ताकि कार्रवाई हो सके।
डीजल टैंक में लगती चिप
डीजल की खपत पर नजर के लिए डीजल टैंक के भीतर एक चिप सहेजे रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरआइएफडी) लगाया जाता है। इसका संबंध बसों में डीजल भरने वाले पंप के नोजल पर लगे सेंसर टैग से होता है। जैसे ही डीजल पड़ता है, पूरी जानकारी कंप्यूटर तक पहुंच जाती है। इसमें कहीं भी हुई छेड़छाड़ या एवरेज का आकलन कर डीजल चोरी का पता लगाया जाता है।
87 बसों में परीक्षण शुरू
सेंसर का परीक्षण अलग-अलग रूट्स की 87 बसों में शुरू कर दिया गया है। एक माह से चल रहे परीक्षण में खासे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अगले माह राजधानी के कैसरबाग डिपो से जुड़ी सभी बसों व उपनगरीय बस सेवा की बसों में सेंसर लगा दिये जाएंगे। उसके बाद अन्य डिपों को आधार बनाकर धीरे-धीरे सभी बसों में सेंसर फिट कर दिये जाएंगे।
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रोडवेज की सभी बसों में सेंसर लगाने का फैसला हुआ है। इस बाबत प्रक्रिया शुरू हो गयी है। परीक्षण पूरा होने के बाद पहले वातानुकूलित बसों में और फिर शेष सभी बसों में ये सेंसर लगाए जाएंगे। इससे निश्चित रूप से रोडवेज को लाभ मिलेगा। -के.रविन्द्र नायक, प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम

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