Sunday, 28 February 2016

सरकार सलाह दे चुकी, इलाज की चिंता आप करें


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-नहीं थम रहा स्वाइन फ्लू, सलाह जारी कर सेहत महकमा बेफिक्र
-घोषणा के बाद भी मेडिकल कालेजों में जांच सुविधा नहीं
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : ठंड जा रही और गर्मी दस्तक दे रही। मौसम बदलाव के इस दौर में संक्रमण समस्या बन सकता है। आप स्वयं सावधान रहिये क्योंकि सरकारी मशीनरी तैयार नहीं है। स्वाइन फ्लू पहले ही थम नहीं पा रहा है और सेहत महकमा सलाह जारी कर बेफिक्र बैठा है। बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बाद भी मेडिकल कालेजों में स्वाइन फ्लू जांच की सुविधा नहीं शुरू हो सकी है।
चिकित्सकों के मुताबिक इस समय संक्रामक रोगों की संभावना अत्यधिक होती है। बच्चों व बुजुर्गों के लिए यह मौसम अत्यधिक संवेदनशील होता है। अस्पतालों में उनकी संख्या तेजी से बढ़ भी रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.वीएन त्रिपाठी ने बताया कि इस मौसम में मलेरिया, संक्रामक ज्वर, टायफाइड, हिपेटाइटिस, गैस्ट्रोइन्ट्राइटिस जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। तेज बुखार, उल्टी, दस्त या बेहोशी होने पर निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या मेडिकल कालेज अस्पताल में तुरंत पहुंचे।
वैसे सावधानियां बरतना मजबूरी भी है। सरकारी मशीनरी संक्रामक रोगों से निपटने के लिए सिर्फ कागजों पर है। यह हालत तब है, जबकि स्वाइन फ्लू के मरीज लगातार अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। संयुक्त स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ.बीवी पाठक स्वीकार करते हैं कि अभी मार्च-अप्रैल तक स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आ सकते हैं। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू के लिए दवाएं सभी जिला अस्पतालों व अन्य अस्पतालों में मुहैया करा दी गयी हैं। हालांकि इस सच का दूसरा पहलू यह भी है कि सेहत महकमा महज एक सलाह जारी कर चुप बैठ गया है। स्वाइन फ्लू जांच की सुविधा प्रदेश में सिर्फ तीन स्थानों लखनऊ के केजीएमयू व संजय गांधी संस्थान और सैफई (इटावा) के ग्र्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान में ही है। यह स्थिति तब है, जबकि स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आना शुरू होते ही चिकित्सा शिक्षा महकमे ने हर मेडिकल कालेज में स्वाइन फ्लू की जांच कराने का दावा किया था। यह दावा अब तक धरातल पर नहीं उतर सका है। डॉ.वीएन त्रिपाठी ने बताया कि गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर, आगरा व मेरठ मेडिकल कालेजों में जांच के लिए पीसीआर मशीनें खरीद ली गयी हैं। लैब टेक्नीशियन व अन्य कर्मचारी नियुक्त कर दिये गए हैं। आइसीएमआर से एमओयू शेष है। यह प्रक्रिया पूरी होते ही जांच शुरू हो जाएगी।
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जरूरी सावधानियां
-बच्चे को भीड़भाड़ वाले इलाकों में न ले जाएं।
-खाने-पीने में सावधानी बरतें, साफ पानी लें।
-खाना ताजा खाएं और ढंक कर रखें।
-मच्छरों से बचाव के बंदोबस्त सुनिश्चित करें।
-घर के आसपास किसी भी हालत में पानी न ठहरने दें।

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