Friday, 29 January 2016

अब यूपी से ज्यादा बनेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर


-अभी प्रदेश में परास्नातक पाठ्यक्रमों की 751 सीटें
-एमसीआइ से मांगी गयी 172 सीटें बढ़ाने की अनुमति
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : मार्च में यूपीपीजीएमईई की घोषणा के साथ प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा के नए सत्र का बिगुल बज गया है। परास्नातक सीटें बढ़ाने की मुहिम के साथ प्रदेश का चिकित्सा शिक्षा विभाग यूपी से ज्यादा विशेषज्ञ डॉक्टर बनाने की तैयारी कर रहा है। अभी प्रदेश में परास्नातक पाठ्यक्रमों की 751 सीटें हैं। एमसीआइ से 172 सीटें बढ़ाने की अनुमति मांगी गयी है।
प्रदेश के मेडिकल कालेजों व परास्नातक संस्थानों में एमडी, एमएस व परास्नातक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राज्य कोटे की सीटों के लिए प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी किंग जार्जेज चिकित्सा विश्वविद्यालय को सौंपी गयी है। 13 मार्च को प्रस्तावित इस परीक्षा के साथ ही चिकित्सा शिक्षा विभाग इस बार प्रदेश से परास्नातक सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रयास शुरू किये गए हैं। इस समय प्रदेश में परास्नातक की कुल 751 सीटें हैं। इनमें से इलाहाबाद में 77, गोरखपुर में 54, झांसी में 55, कानपुर में 113, केजीएमयू लखनऊ में 181, मेरठ में 70, आगरा में 102, क्षेत्रीय नेत्र चिकित्सा संस्थान (आरआइओ) सीतापुर में 15, ग्र्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई में 48, डॉ.राम मनोहर लोहिया संस्थान में 14 व संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में 22 सीटें हैं। इनमें से आधी सीटें अखिल भारतीय परास्नातक मेडिकल प्रवेश परीक्षा (एआइपीजीईई) से भरी जाती हैं।
प्रदेश में एमडी, एमएस व डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की सीटें कई वर्षों से 751 पर अटकी हुई हैं। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ.वीएन त्रिपाठी ने बताया कि अब पूरा जोर परास्नातक सीटें बढ़ाने पर है। इसके लिए भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआइ) के समक्ष अलग-अलग कालेजों को मिलाकर कुल 172 सीटों पर आवेदन किया गया है। एमसीआइ की टीमें सभी कालेजों का निरीक्षण भी कर चुकी हैं। अब कोशिश है कि यूपीपीजीएमईई की काउंसिलिंग के पहले इनकी अनुमति मिल जाए, ताकि प्रदेश से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक निकल सकें।
अब डिप्लोमा उत्तीर्ण भी बनेंगे सीनियर रेजीडेंट
राब्यू, लखनऊ : प्रदेश के मेडिकल कालेजों व परास्नातक शिक्षा संस्थानों में डिप्लोमा उत्तीर्ण भी सीनियर रेजीडेंट बन सकेंगे। परास्नातक की पढ़ाई के दौरान रेजीडेंट या जूनियर डॉक्टर कहे जाने वाले विद्यार्थी परास्नातक डिग्र्री लेने के बाद सीनियर रेजीडेंट के रूप में काम करते हैं। अभी तक सीनियर रेजीडेंट के रूप में काम करने के लिए परास्नातक डिग्र्री यानी एमडी या एमएस करना जरूरी होता था। अब डिप्लोमा यानी डीसीएच, डीजीओ या डीऑर्थ जैसे पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने वाले डॉक्टर भी सीनियर रेजीडेंट के रूप में काम कर सकेंगे। इस बाबत आदेश जारी कर दिये गए हैं। 

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