Tuesday, 29 December 2015

मुफ्त ट्रिपल सी से पिछड़ों को रोजगार की राह


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-कंप्यूटर का ककहरा
-तीन माह के कोर्स ऑन कम्प्यूटर कॉन्सेप्ट्स का खर्च उठाएगी सरकार
-एक लाख रुपये आय सीमा, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने की तैयारी
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डॉ.संजीव, लखनऊ : प्रदेश के पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने के लिए सरकार कंप्यूटर का ककहरा सहेजे तीन माह के कोर्स ऑन कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स यानी ट्रिपल सी की पढ़ाई कराएगी। इसके लिए एक लाख रुपये की आय सीमा निर्धारित कर पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने की तैयारी है।
कुछ वर्षों से सरकारी नौकरियों में ट्रिपल सी पाठ्यक्रम की अनिवार्यता के बाद पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को इस पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण दिये जाने का प्रस्ताव किया गया है। निदेशक पुष्पा सिंह के मुताबिक प्रस्ताव को शासन ने हरी झंडी दे दी है। अभी तक विभाग कंप्यूटर के ओ लेवल पाठ्यक्रम के लिए अनुदान देता था, किंतु उससे बहुत अधिक संख्या में छात्र-छात्राएं लाभान्वित नहीं होते थे। अब ट्रिपल सी पाठ्यक्रम की उपयोगिता देखते हुए इससे अधिकाधिक छात्र-छात्राओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराए जा सकेंगे। तीन माह के ट्रिपल सी पाठ्यक्रम का संचालन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी से संबद्ध संस्थानों में होगा। इसमें पंजीकरण कराने वाले विद्यार्थियों को तीन माह पढ़ाने के बदले पिछड़ा वर्ग विभाग संबंधित संस्थान को 3500 रुपये का भुगतान करेगा। अभी तक विभाग की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आय सीमा गरीबी रेखा के नीचे की थी। ट्रिपल सी पाठ्यक्रम की पढ़ाई के लिए इसे एक लाख रुपये कर दिया गया है। विभाग के उपनिदेशक शैलेश के मुताबिक आवेदन ऑनलाइन करने होंगे और मानकों पर खरे उतरने के बाद काउंसिलिंग के माध्यम से संस्थान का आवंटन किया जाएगा। जिन जिलों में मान्यता प्राप्त संस्थान नहीं होंगे, वहां के विद्यार्थियों को पड़ोसी जिले में प्रवेश दिलाया जाएगा। लाभार्थी विद्यार्थियों की संख्या बजट के अधीन मिलने वाली धनराशि पर निर्भर करेगी।
बढ़ेगा ओ लेवल का अनुदान
पिछड़ा वर्ग विभाग ने ओ लेवल कंप्यूटर पाठ्यक्रम की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए अनुदान की राशि बढ़ाने का प्रस्ताव भी किया है। अभी प्रति विद्यार्थी 10 हजार रुपये मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है। इस वर्ष इस योजना के लिए 11 करोड़ रुपये का प्रावधान था, अगले वित्तीय वर्ष में इसे बढ़ाने की मांग भी की जा रही है।
75 फीसद उपस्थिति जरूरी
पिछड़ा वर्ग निदेशक के अनुसार विद्यार्थियों की गंभीरता बरकरार रखने और संस्थानों द्वारा कोई मनमानी करने से रोकने के लिए प्रवेश लेने वाला विद्यार्थियों की कम से कम 75 फीसद उपस्थिति जरूरी होगी। इस उपस्थिति का प्रमाण देने पर ही अनुदान राशि का भुगतान किया जाएगा। परीक्षाफल का प्रतिशत भी निर्धारित किया जाएगा। ओ लेवल मामले में राष्ट्रीय सफलता प्रतिशत को आधार बनाकर फैसला किया जाएगा।

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