Thursday, 31 December 2015

खरी नहीं उतरीं 38 फीसद दवाएं

-4723 नमूनों का परीक्षण, मानक स्तर पर मिले महज 2902
-बाजार में झोंकी गयीं दस फीसद से अधिक नकली दवाएं
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : दवा बाजार में नकली दवाओं का बोलबाला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बाजार में दस फीसद से अधिक नकली दवाएं झोंक दी गयी हैं। 38 फीसद दवाएं मानकों के अनुरूप न होने के कारण पर्याप्त असर नहीं करती हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने वर्ष समाप्त होते-होते अपने कामकाज का जो ब्योरा जारी किया है, उसके मुताबिक आठ महीने में विभाग की ओर से छापेमारी कर जांच के लिए प्रदेश भर से दवाओं के 5150 और कास्मेटिक्स उत्पादों के 301 नमूने प्रयोगशालाओं को भेजे गए। इनमें से 4723 नमूनों की जांच रिपोर्ट ही चौंकाने वाली है। इनमें से 506 दवाएं नकली निकली हैं। इस तरह बाजार में दस फीसद से अधिक नकली दवाएं मौजूद होने की पुष्टि हुई है। इनके अलावा महज 2902 नमूने ही मानक स्तर के अनुकूल पाए गए हैं। शेष 1821 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इस तरह आंकड़े ही इस बात की पुष्टि करते हैं कि 38 फीसद से अधिक दवाएं घटिया हैं और संभवत: यही कारण है कि तमाम बार दवाएं असर नहीं करतीं और लोगों को परेशान होना पड़ता है।
दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग भी इन दवाओं पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर रहा है। अधिकारी इसके लिए कर्मचारियों की कम संख्या को जिम्मेदार ठहराते हैं। विभाग में संयुक्त आयुक्त व उपायुक्त के एक-एक पद स्वीकृत हैं किन्तु इन पद पर किसी की नियुक्ति नहीं है। सहायक आयुक्त के दो पद खाली हैं, वहीं औषधि निरीक्षकों के भी 25 पद खाली हैं। औषधि निरीक्षकों के 104 पदों में से 58 पद अस्थायी और 46 स्थायी हैं। इन 46 स्थायी पदों के विपरीत महज 11 औषधि निरीक्षक स्थायी हैं। औषधि निरीक्षकों की कमी के कारण अपेक्षा के अनुरूप जांच पड़ताल नहीं हो पाती और तमाम प्रकरण औषधि निरीक्षकों के स्तर पर ही विवेचना की प्रतीक्षा किया करते हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त एके सिंह ने विवेचना के साथ अदालती कार्रवाई में भी तेजी लाने को कहा है। विभागीय मंत्री इकबाल महमूद ने भी छापों की संख्या बढ़ाने के साथ समयबद्ध ढंग से कर्मचारियों की नियुक्ति करने के निर्देश दिये हैं।

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