Tuesday, 24 November 2015

ऐसे कैसे दूर होगी प्रसूति विशेषज्ञों की कमी!

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-स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के लिए भेजे नामों में 90 फीसद पुरुष
-छात्राओं के साथ मेडिकल कालेजों में करेंगे डीजीओ की पढ़ाई
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : पहले ही स्त्री एवं प्रसूति विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग के सामने अब अजब स्थिति है। हाल ही में विभागीय चयन से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के लिए भेजे जाने के लिए चयनित चिकित्सकों में 90 फीसद से अधिक पुरुष हैं। अब इन पुरुष विशेषज्ञों से महिलाएं कैसे इलाज कराएंगी, यह सवाल खड़ा हो रहा है।
सरकारी मेडिकल कालेजों में परास्नातक पाठ्यक्रमों एमडी, एमएस, डीजीओ, डीसीएच आदि में प्रवेश के लिए तीस फीसद सीटें प्रांतीय चिकित्सा सेवा के चिकित्सकों के लिए आरक्षित हैं। सरकारी चिकित्सा सेवा के लिए युवाओं को आकर्षित करने की दृष्टि से यह नियम बनाया गया था। इन चिकित्सकों को मेडिकल कालेजों के परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए परीक्षा (पीजीएमईई) भी नहीं देनी होती है। स्वास्थ्य महकमा सूची बनाकर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय को सौंप देता है, जिसके बाद उन्हें सीधे प्रवेश मिल जाता है।
इस बार भी बीते नौ व दस नवंबर को हुई काउंसिलिंग के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग को जो सूची सौंपी गयी है, उससे अधिकारी से लेकर डॉक्टर तक चौंक गए हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में परास्नातक डिप्लोमा पाठ्यक्रम डिप्लोमा इन गायनोकोलॉजी एंड ऑब्सटेट्रिक्स (डीजीओ) करने के लिए जिन 13 चिकित्सकों की सूची चिकित्सा शिक्षा विभाग को सौंपी गयी है, उनमें से 12 पुरुष हैं। पहले ही ग्र्रामीण अंचल में महिलाएं पुरुषों से इलाज तक कराने में संकोच करती हैं। अब ये पुरुष चिकित्सक यदि स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात किये जाएंगे तो महिलाएं इनके साथ कितनी सहज होंगी, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बीते दिनों स्वास्थ्य विभाग के आंकलन में ही यह तथ्य सामने आ चुका है कि ग्र्रामीण महिलाएं पुरुष चिकित्सकों के साथ असहज महसूस करती हैं, इसलिए संस्थागत प्रसव भी पर्याप्त संख्या में नहीं हो पा रहे हैं। फिलहाल ये सभी पुरुष चिकित्सक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ बनने के लिए अलग-अलग मेडिकल कालेजों में प्रवेश लेंगे और वहां छात्राओं के साथ पढ़ाई करेंगे। दरअसल प्रवेश परीक्षा पीजीएमईई देकर आने वाले चिकित्सकों में से एक भी पुरुष ने डीजीओ नहीं चुना है। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ.वीएन त्रिपाठी का कहना है कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ पुरुष या महिला, कोई भी हो सकता है। सामान्यत: पीजीएमईई में सफल छात्र स्त्री एवं प्रसूति विशेषज्ञता में प्रवेश नहीं लेते हैं, इसलिए यह चौंकाने वाला तथ्य है। चिकित्सा शिक्षा विभाग अपने मेडिकल कालेजों के लिए स्वास्थ्य विभाग की सूची के अनुरूप प्रवेश देगा और उन सभी पुरुष चिकित्सकों को वहां पढ़ाई करनी होगी। 

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