Monday, 23 November 2015

आउटसोर्सिंग से कर्मचारियों की नियुक्ति में जरूर मिले आरक्षण


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-राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के मुख्य सचिव को निर्देश
-2008 में जारी शासनादेश का नहीं हो रहा अनुपालन
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश के तमाम सरकारी महकमों में स्थायी नियुक्ति न होने की दशा में आउटसोर्सिंग से कर्मचारी नियुक्त किये जा रहे हैं। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने मुख्य सचिव को निर्देश जारी कर आउटसोर्सिंग के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में भी आरक्षण सुनिश्चित करने को कहा है। वर्ष 2008 में जारी शासनादेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि आउटसोर्सिंग से नियुक्ति में भी आरक्षण मिलना चाहिए, किन्तु उसका अनुपालन नहीं हो रहा है।
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राम आसरे विश्वकर्मा ने 23 जनवरी 2008 को जारी शासनादेश संलग्न करते हुए लिखा है कि राज्य सरकार के सभी विभागों, निगमों व परिषदों आदि में आउटसोर्सिंग के माध्यम से या अनुबंध के आधार पर रखे जा रहे कर्मचारियों की नियुक्ति में भी आरक्षण के सभी मापदंडों का पालन किया जाना चाहिए। यहां तक कि कार्यालयों के रखरखाव आदि तक का काम यदि किसी संस्था को दिया जाता है तो इस बाबत होने वाले करार में आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। हां, इस आदेश में लोक निर्माण, सिंचाई, ग्र्राम्य विकास आदि विभागों के ऐसे कार्यों में लागू नहीं होगी जो परंपरागत रूप से ठेके के आधार पर कराए जाते हैं। आयोग अध्यक्ष के मुताबिक शासनादेश का पालन प्रदेश के अधिकांश विभागों में नहीं हो रहा है। कई विभागों को तो इस शासनादेश की जानकारी तक नहीं है। उन्होंने मुख्य सचिव से कहा है कि प्रमुख सचिवों, सचिवों व विभागाध्यक्षों को पुन: आदेश जारी कर हर स्तर पर आरक्षण सुनिश्चित कराएं। इस आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाए, ताकि समाज के पिछड़े वर्ग को न्याय मिल सके।
निजी क्षेत्र में आरक्षण की बात दोहराई
मुख्य सचिव को लिखे पत्र के साथ पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष ने निजी क्षेत्र में आरक्षण की बात भी दोहराई है। उन्होंने 11 जनवरी 2008 को जारी शासनादेश का हवाला दिया है। शासनादेश में राज्य सरकार की 11 से 49 प्रतिशत तक पूंजीगत भागीदारी वाली इकाइयों में आरक्षण सुनिश्चित करने की बात कही गयी थी। इसमें विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ सभी वर्गों का विकास सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण लागू करने का तर्क दिया गया है। 

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