Sunday, 22 November 2015

छात्रवृत्ति प्रबंधन तक सिमटा पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग

-जिला स्तरीय दफ्तरों की दशा देख चौंके मंत्री
-अफसरों से नई योजनाओं के प्रस्ताव मांगे
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : पिछड़ों के कल्याण के लिए सृजित किया गया पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग महज छात्रवृत्ति प्रबंधन तक सिमट कर रह गया है। कई योजनाएं या तो बंद हो गयी हैं या विस्तार नहीं ले पा रहीं। नए मंत्री ने जिला स्तरीय दफ्तरों की दशा देखी तो चौंके बिना न रह सके। अब अफसरों से नई योजनाओं के प्रस्ताव मांगे गए हैं।
नए पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री साहब सिंह सैनी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के दफ्तरों का दौरा किया तो चौंक गए। एक अधिकारी, एक लिपिक व एक चपरासी के सहारे चलाए जा रहे इन दफ्तरों का कामकाज छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के मैनेजमेंट तक सिमट कर रह गया है। छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के अलावा इस समय शादी-बीमारी योजना बंद ही चल रही है, ओ लेवल कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना के लिए इस वर्ष अब तक कोई आवंटन नहीं हुआ है। इन स्थितियों का आकलन कर मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक कर उनसे नयी योजनाओं के प्रस्ताव मांगे हैं।
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आधे से ज्यादा पद रिक्त
यूं तो इस विभाग के गठन का उद्देश्य प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्गों का सामाजिक, शैक्षिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करना था किन्तु इस ओर काम हो ही नहीं रहा है। एक आइएएस निदेशक व एक पीसीएस संयुक्त निदेशक की अगुवाई वाले विभाग में आधे से अधिक पद रिक्त हैं। 75 जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारियों में से 53 पद ही भरे हैं। सपोर्टिंग स्टाफ के 307 पदों में से 180 पद खाली हैं।
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आय सीमा बढ़वाना भी जरूरी
पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री साहब सिंह सैनी भी स्वीकार करते हैं कि विभाग महज छात्रवृत्ति प्रबंधन के काम में सिमट कर रह गया है। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के हित की योजनाओं के विस्तार के लिए वे स्वयं मुख्यमंत्री से मिलेंगे। इसके अलावा पिछड़े वर्गों को विभिन्न योजनाओं के लाभ के लिए आय सीमा बढ़ाकर दो लाख रुपये करने प्रस्ताव भी मांगा गया अभी दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा दो लाख है, इसे सभी योजनाओं पर लागू किया जाना चाहिए। 

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