Tuesday, 27 October 2015

कम होने लगीं बीएएमएस की सीटें


-सिर्फ लखनऊ व वाराणसी को मिली सीसीआइएम की मान्यता
-मुजफ्फरनगर अमान्य, पांच कालेजों को फैसला का इंतजार
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश में एलोपैथिक मेडिकल कालेज खोलने की होड़ के बीच आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा खासी पिछड़ रही है। इस ओर ध्यान न दिये जाने के कारण सूबे में बीएएमएस की सीटें कम होने का सिलसिला शुरू हो गया है। बुधवार से काउंसिलिंग है और अब तक राज्य के सिर्फ दो आयुर्वेदिक कालेजों को प्रवेश की मंजूरी मिली है। मुजफ्फरनगर आयुर्वेदिक कालेज को तो अमान्य घोषित कर दिया गया है।
लखनऊ, वाराणसी,ं मुजफ्फरनगर, बरेली, पीलीभीत, बांदा, इलाहाबाद व झांसी आयुर्वेदिक कालेजों में बीएएमएस की 320 सीटें हैं। इन कालेजों में शिक्षकों के अभाव, इलाज की पुख्ता व्यवस्था न होने और मरीजों के न पहुंचने के कारण इनकी मान्यता लंबे समय से खतरे में थी। इन कालेजों को मान्यता का जिम्मा संभाले सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआइएम) से मान्यता न मिलने के कारण सीपीएमटी की पहली तीन काउंसिलिंग में बीएएमएस को शामिल ही नहीं किया जा सका। इन कालेजों में हर हाल में 31 अक्टूबर तक प्रवेश पूरे कर लेने का लक्ष्य है किन्तु इस वर्ष यह असंभव दिख रहा है।
हालात ये हैं कि इन कालेजों में प्रवेश के लिए सीपीएमटी की काउंसिलिंग 28 व 29 अक्टूबर को होनी है किन्तु अब तक सिर्फ लखनऊ व वाराणसी आयुर्वेदिक कालेजों के लिए ही सीसीआइएम की मंजूरी मिली है। इस तरह अब तक 320 में से सिर्फ 90 बीएएमएस सीटों को मंजूरी मिली है। इन कालेजों के निरीक्षण में सीसीआइएम की टीम ने सख्ती बरतते हुए मुजफ्फरनगर के आयुर्वेदिक कालेज को अमान्य समाप्त कर दिया है। वहां की 30 सीटों के साथ राज्य बीएएमएस की सीटें कम होने का सिलसिला शुरू हो गया है। शेष 200 सीटों का मामला भी अधर में है। सीसीआइएम की टीम बरेली, पीलीभीत, बांदा, इलाहाबाद व झांसी आयुर्वेदिक कालेजों का निरीक्षण तो कर चुकी है किन्तु अब तक वहां के बारे में फैसला नहीं लिया है।
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सत्र में होगा विलंब
प्रदेश के आयुर्वेद कालेजों का सत्र बमुश्किल समयबद्ध हो पाया था, किन्तु इस बार मान्यता न मिल पाने के कारण इसके लेट होने का खतरा है। इस संबंध में आयुर्वेद निदेशक डॉ.सुरेश चंद्रा का कहना है कि सीपीएमटी काउंसिलिंग में हम वाराणसी की शेष पांच सीटों के साथ लखनऊ की 49 सीटें भर लेंगे। अगले दो दिन में यदि सीसीआइएम ने किसी कालेज को मान्यता दी तो उसे भी काउंसिलिंग में शामिल करा लिया जाएगा। सत्र में विलंब होने पर सीसीआइएम के फैसले के बाद ही कोई रणनीति बनाई जाएगी।

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