Monday, 28 September 2015

पिछड़ों में बंटवारे से पिछड़ा वर्ग आयोग की मनाही

-उत्तर प्रदेश का सुझाव पहले सभी राज्यों की बैठक बुलायी जाए
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग ने पिछड़ों के भीतर बंटवारा कर अतिपिछड़ों को चिन्हित करने से साफ इनकार कर दिया है। साथ ही राष्ट्रीय आयोग को पत्र लिखकर राज्य आयोगों की बैठक बुलाकर इस बाबत व्यापक चर्चा की मांग की है।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने बीते दिनों उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग सहित प्रदेश के सभी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोगों को भेजे अपने पत्र में पिछड़ा वर्ग के भीतर भी अतिपिछड़ों को अलग करने पर जोर दिया था। प्रस्ताव के मुताबिक आरक्षण के कई वर्षों के बाद भी पिछड़े वर्ग की सभी जातियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है, इसलिए पिछड़ों में भी अतिपिछड़े अलग से चिह्नित किये जाने चाहिए। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राम आसरे विश्वकर्मा ने बताया कि आयोग ने इस प्रयास को पिछड़े वर्ग के लोगों को बांटने की कोशिश माना है। इसीलिए उन्होंने स्पष्ट रूप से इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से मना कर दिया।
राष्ट्रीय आयोग को लिखे पत्र में विश्वकर्मा ने कहा है कि अभी तक पिछड़े वर्गों का जातिवार आकलन नहीं हुआ है। पता किया जाना चाहिए कि किस जाति के लोग सामाजिक, आर्थिक व शैक्षिक रूप से कहां तक पहुंचे। 27 प्रतिशत आरक्षण के बाद अनेक जातियां पिछड़ों की सूची में बढ़ाई गयी हैं तो अब आरक्षण प्रतिशत पर भी पुनर्विचार होना चाहिए। पिछड़ों के लिए क्रीमीलेयर व्यवस्था पहले ही लागू है, जिसके दायरे में आते ही आरक्षण का लाभ मिलना बंद हो जाता है। उनकी राय है कि बैठक के माध्यम से देश भर के पिछड़े वर्ग के लोगों की समस्याओं पर चर्चा भी की जा सकेगी।

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