Friday, 25 September 2015

10 वेंटिलेटर, 12 डॉक्टर, तीन करोड़ की दवाएं


-सेहत का सच-
-प्रमुख सचिव ने गोरखपुर मेडिकल कालेज से मांगी दैनिक रिपोर्ट
-असहयोग करने वाले डॉक्टर हटेंगे, तुरंत भरे जाएं सभी खाली पद
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डॉ.संजीव, लखनऊ
जानलेवा इंसेफ्लाइटिस के जोरदार प्रकोप के बावजूद इलाज में लापरवाही पर शासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। दैनिक जागरण में प्रकाशित 'सेहत का सचÓ अभियान के बाद प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) डॉ.अनूप चंद्र पाण्डेय ने गोरखपुर मेडिकल कालेज से दैनिक रिपोर्ट मांगने के साथ वहां 10 नए वेंटिलेटर लगाने, 12 डॉक्टरों की तैनाती करने और तत्काल दवाओं के लिए तीन करोड़ रुपये की दवाएं खरीदने के आदेश जारी किये हैं। असहयोग करने वाले डॉक्टरों को हटाने व सभी खाली पद तुरंत भरने के निर्देश भी दिये गए हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार के कई जिले इस समय इंसेफ्लाइटिस से कराह रहे हैं। अधिसंख्य गंभीर मरीज गोरखपुर मेडिकल कालेज भेजे जाते हैं। दैनिक जागरण ने हाल ही में चिकित्सकीय अराजकता की खबरें विस्तार से प्रकाशित कीं, तो चिकित्सा शिक्षा महकमा सक्रिय हुआ। प्रमुख सचिव ने गोरखपुर मेडिकल कालेज के प्राचार्य से इंसेफ्लाइटिस व दिमागी बुखार की स्थितियों पर दैनिक रिपोर्ट भेजने को कहा है। रोज सुबह नौ बजे आने वाली यह रिपोर्ट मुख्य सचिव तक भेजी जाएगी। मेडिकल कालेज के कुछ शिक्षकों द्वारा प्रशासनिक असहयोग की शिकायत सामने आने पर उन्हें तुरंत हटाने के लिए प्राचार्य से रिपोर्ट मांगी गयी है, वहीं कालेज के सभी रिक्त पद तुरंत अभियान चलाकर भरने के निर्देश दिये गए हैं। वहां 10 और वेंटिलेटर लगाने के आदेश दिये गए हैं। 56 वेंटिलेटरों के साथ अब वहां इनकी कुल संख्या 66 हो जाएगी।
इसके अलावा हर मरीज को भर्ती करने के लिए एक और वार्ड इंसेफ्लाइटिस व दिमागी बुखार के मरीजों के लिए आरक्षित करने को कहा गया है। डॉक्टरों की कमी से निपटने के लिए कानपुर, मेरठ, आगरा, झांसी व इलाहाबाद से बाल रोग व मेडिसिन विभाग के 12 जूनियर डॉक्टरों को तीन माह के लिए गोरखपुर मेडिकल कालेज से संबद्ध कर दिया गया है। मरीजों को अस्पताल से दवाएं न मिलने का मामला सामने आने पर प्रमुख सचिव ने तीन करोड़ रुपये दवाओं के लिए जारी करने के आदेश दिये हैं। इनमें से असाध्य रोगों के बजट से 50 लाख रुपये बुधवार को जारी भी कर दिये गए, शेष ढाई करोड़ रुपये के लिए वित्त विभाग में फाइल भेजी गई है।
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हर जीएनएम का प्रशिक्षण मेडिकल कालेज में
मेडिकल कालेज में नर्सों की कमी से निपटने के लिए गोरखपुर के सभी पैरामेडिकल शिक्षण संस्थानों में जीएनएम पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले हर विद्यार्थी का प्रशिक्षण मेडिकल कालेज में ही कराया जाएगा। विशेष सचिव अङ्क्षरदम भïट्टाचार्य द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि इस वर्ष प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी न्यूनतम 45 दिन और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी न्यूनतम 60 दिन गोरखपुर मेडिकल कालेज से संबद्ध रहेंगे।
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स्वास्थ्य विभाग से गंभीर मरीज ही भेजे जाएं मेडिकल कालेज
सेहत का सच अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की निष्क्रियता व जिला अस्पतालों द्वारा भी सभी मरीज मेडिकल कालेज भेज दिये जाने की बात प्रकाश में आयी थी। इस पर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ.वीएन त्रिपाठी ने स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखकर सिर्फ गंभीर मरीजों को ही मेडिकल कालेज भेजने की बात कही है।
इंसेफ्लाइटिस का उदाहरण देते हुए डॉ.त्रिपाठी ने लिखा है कि जिला अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात होने के बाद भी मरीजों को सीधे मेडिकल कालेज भेज दिया जाता है। कई बार तो सामान्य रोगियों की संख्या अधिक हो जाने के कारण गंभीर रोगियों पर पूरा फोकस नहीं हो पाता पूर्वांचल के सभी जिला अस्पतालों में इंसेफ्लाइटिस व दिमागी बुखार के मरीजों के लिए विशेष वार्ड बनाकर वहां उनका समुचितउपचार सुनिश्चित कराने की बात भी कही गयी है।
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मजबूत होंगे इंसेफ्लाइटिस प्रभावित जिला अस्पताल
दैनिक जागरण में प्रकाशित सेहत का सच अभियान में उजागर समस्याओं का समाधान करने की दिशा में पहल करते हुए इंसेफ्लाइटिस प्रभावित सात जिलों के जिला अस्पतालों को और मजबूत करने का फैसला लिया गया है। प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अरविंद कुमार ने बताया कि इन अस्पतालों में डाक्टरों के साथ नर्सों व पैरामेडिकल स्टाफ भी बढ़ाया जाएगा।
प्रमुख सचिव ने बताया कि सभी जिला अस्पतालों से नियमित रिपोर्ट मांगी जा रही है। गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थ नगर व संतकबीर नगर के जिला अस्पतालों में स्थापित बाल रोग सघन चिकित्सा कक्ष अभी डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के कारण ठीक प्रकार से नहीं चल पा रहे थे। इस पर हर जिला अस्पताल में पांच डॉक्टरों, बीस नर्सों व चार पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति तुरंत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जिला स्तर पर ही चिकित्सकों की चिह्नित कर उन्हें संविदा पर रखने का फैसला लिया गया है। 

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